धनबाद हादसा: सोनरडीह में तीन मौतों से कितना "पिघला" धनबाद? अब क्या करने जा रही बीसीसीएल!

    धनबाद हादसा: सोनरडीह में तीन मौतों से कितना "पिघला" धनबाद? अब क्या करने जा रही बीसीसीएल!

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद के सोनरडीह  में तीन मौतों  से कितना "पिघला"  धनबाद.  यह सवाल बड़ा है, क्योंकि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी , इसकी गारंटी कोई देने की स्थिति में नहीं है.  बीसीसीएल सवालों में है तो झरिया पुनर्वास योजना का फेज 2 की प्रगति भी सवालों के घेरे में है.  कब तक धरती फटती रहेगी और लोगों की जान जाती रहेगी.  कब तक जमीन के भीतर आग  और ऊपर की जिंदगी के वोट  से नेता विधायक और सांसद बनते रहेंगे.कब तक कोयले की खनक पर नाचेगी कोयलांचल की राजनीति.  जनता ने तो उन्हें वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुना है, लेकिन क्या वह प्रतिनिधि होने की भूमिका निभा रहे हैं? क्या बीसीसीएल के पास कोई ऐसा आंकड़ा है, जिससे  यह पता चले कि कौन-कौन से इलाके बिल्कुल खतरनाक है. धनबाद में ही डीजीएमएस भी है ,तो क्यों उसके क्रियाकलापों पर उठते रहे हैं सवाल. 

    डीजीएमएस की भूमिका पर क्यों उठाते हैं सवाल 
     
    यह अलग बात है कि बीसीसीएल ने कई इलाकों को खतरनाक घोषित कर दिया है.  वहां खतरा भी है, लेकिन क्या वहां के   लोगों के पुनर्वास के लिए ईमानदारी से काम किया जा रहा है? और शायद यही वजह है कि  घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ता है और कोयला अधिकारी इसके शिकार बनते है.  सोनारडीह  में बुधवार को कुछ ऐसा ही हुआ.  सूत्र बता रहे हैं कि सोनारडीह  की घटना के बाद बीसीसीएल थोड़ा सक्रिय हुआ है.  और खतरनाक इलाकों से पुनर्वास के  काम में जल्दीबाजी की तैयारी है.  इसके साथ ही साथ अवैध खनन भी एक बड़ा मुद्दा है.  अवैध खनन को रोकना भी कोयलांचल  में एक बड़ी चुनौती है. 

    बीसीसीएल  की अपील में क्या कहा  गया है 
     
    इधर, गुरुवार को  बीसीसीएल  ने एक अपील जारी की है.  यह अपील केंदुआडीह   के लिए की गई है.  कहा गया है कि कई वर्षों से आप सभी इस बात से अवगत है, कि  केंदुआडीह  कोलियरी  क्षेत्र का संपूर्ण मालिकाना हक बीसीसीएल के पास है.  इस क्षेत्र में  भू -धंसान , पोर्ट हाल एवं अग्नि प्रभावित घटनाएं होती रही हैं.  प्रभावित निवासियों को  सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पूर्व में अनेकों बार अवगत कराया जा चुका है.  हाल ही में 3 दिसंबर 25 को राजपूत बस्ती, पुराना जीएम  बंगला,  मस्जिद मोहल्ला और नया धौड़ा  एवं आसपास के क्षेत्र में जहरीली गैस का रिसाव  हो रहा है .  यह जहरीली गैस स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है.  इसके संपर्क में रहने से जान भी जा सकती है. 

    बीसीसीएल -तीन संस्थानों ने क्या दिए हैं सुझाव 

     बीसीसीएल के द्वारा जहरीली गैस के रिसाव को देखते हुए देश के तीन प्रख्यात वैज्ञानिक संस्थान CIMFR,PMRC ,IIT(ISM)  को लगाया गया है .  वर्तमान में वैज्ञानिक सुझाव के अनुसार उन सभी प्रभावित क्षेत्र में बोर होल  कर नाइट्रोजन गैस डाला जा रहा है .  नाइट्रोजन गैस बोर होल के द्वारा डालने से जहरीली गैस की मात्रा में जितनी कमी होने की उम्मीद थी, उतनी कमी नहीं हो रही है.  जहरीली गैस के अध्ययन के मद्देनजर  वैज्ञानिक दल का मानना है कि गैस रिसाव के स्थान पर गर्मी बढ़ने से जहरीली गैस रिसाव की मात्रा में वृद्धि होने की संभावना है.  आने वाले गर्मी के मौसम के लिए यह स्थिति और भयावह  हो सकती है.  अतः राजपूत बस्ती, पुराना जीएम बंगला , मस्जिद मोहल्ला एवं नया धौड़ा  तथा  आसपास के क्षेत्र में रहने वाले सभी निवासियों से प्रार्थना है कि इस असुरक्षित क्षेत्र में ना रहे.   ताकि जान माल की क्षति से बचा सके.  

    असुरक्षित जगह पर नहीं रहें ,लें यह सुविधा 
     
     प्रभावित क्षेत्र में निवास करने वालों  को भी यह जानकारी दी जा रही है कि सरकार द्वारा आप सभी की सुरक्षा को लेकर झरिया मास्टर प्लान के तहत सुरक्षित स्थानों पर आवासों का निर्माण कराया गया है.  आप सभी आवश्यक प्रमाण पत्र के साथ आवेदन पत्र झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार, धनबाद के कार्यालय में जमा करा कर आवास एवं नियम संगत मुआवजा पा  सकते हैं.  इस संदर्भ में बीसीसीएल की इकाई कार्यालय के द्वारा सभी तरह का यथा संभव  न्याय संगत सहयोग किया जाएगा।   बावजूद भी यदि आप इस असुरक्षित स्थान पर निवास करते हैं, वैसी स्थिति में आपकी सुरक्षा की संपूर्ण जवाबदेही आपके स्वयं की होगी एवं बीसीसीएल प्रबंधन इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा।  यह सूचना परियोजना पदाधिकारी ,केंदुआडीह , पुटकी बलिहारी क्षेत्र ,बीसीसीएल के हस्ताक्षर से जारी की गई है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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