Dhanbad Politics: कैसे शुरू हो गया धनबाद में राजनीति का  विकेंद्रीकरण ,कौन होगा बड़ा "पावर सेंटर" !!

    Dhanbad Politics: कैसे शुरू हो गया धनबाद में राजनीति का  विकेंद्रीकरण ,कौन होगा बड़ा "पावर सेंटर" !!
    धनबाद की राजनीति का क्या विकेंद्रीकरण होने जा रहा है? क्या धनबाद की राजनीति अब संक्रमण काल से ऊपर उठकर कई खेमों  में बंटने  जा रही है ?

    धनबाद(DHANBAD) | धनबाद की राजनीति का क्या विकेंद्रीकरण होने जा रहा है? क्या धनबाद की राजनीति अब संक्रमण काल से ऊपर उठकर कई खेमों  में बंटने  जा रही है ?क्या धनबाद में नए-नए "पावर सेंटर" तैयार हो रहे हैं? क्या निगम चुनाव में हारे हुए उम्मीदवार नए ढंग से कोयलांचल  में राजनीति की जमीन खोज  रहे हैं? यह बात तो तय है कि कोयलांचल में भाजपा की पकड़ अन्य दलों की तुलना में फिलहाल मजबूत है.  इसलिए भाजपा की चर्चा अधिक होती है.  निगम चुनाव के पहले भाजपा में भी कई "पावर सेंटर" थे.  अभी भी हैं ,लेकिन धीरे-धीरे यह  पावर सेंटर पांच की बजाय अब कम  केन्द्रो  में सिमटती  दिख रहे  है. 

    धनबाद में अब शुरू हुई पावर सेंटर की लड़ाई 
     
    अभी भी भाजपा की राजनीति से पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह को अलग  अलग कर नहीं देखा जा सकता है.   सांसद ढुल्लू महतो  का भी अपना एक "पावर सेंटर" है.  एक "पावर सेंटर" विधायक राज सिन्हा  का भी है.  निगम चुनाव के बाद सिंह मेंशन बड़ा पावर सेंटर  बनकर सामने आया है.  पूर्व विधायक संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह इस "पावर सेंटर" को और मजबूती देने में लगे हुए हैं.  पावर सेंटर इसलिए भी कहा जा रहा है कि निगम चुनाव में विरोध करने वाले भी सिंह मेंशन पहुंच रहे हैं और खुद को समर्थक बता रहे हैं.  खास बात यह देखी जा रही है कि निगम चुनाव में जो उम्मीदवार हार गए, उन लोगों ने भी मैदान नहीं छोड़ा है और उनकी नजर अब आगे के चुनाव पर है.  

    धनबाद पर झामुमो का आगे हो सकता है दावा 

    यह बात तो सच है कि झामुमो समर्थित उम्मीदवार भले ही निगम चुनाव में हार गए  है, इतना तो तय है कि विधानसभा चुनाव में अब झामुमो  धनबाद सीट पर दावा ठोक सकता है और कांग्रेस के लिए असहज  स्थिति हो सकती है.  गठबंधन में भी धनबाद सीट कांग्रेस को मिलता रहा है.  भाजपा में भी कई ऐसे उम्मीदवार सक्रियता बनाए हुए हैं, जो विधानसभा सीट की राजनीति करना चाहते हैं.  यह  अलग बात है कि यह मामला सिर्फ धनबाद विधानसभा का ही नहीं है, बल्कि अन्य विधानसभा क्षेत्र में भी इस तरह की सक्रियता है.   सिंह मेंशन के एक घड़ा रामधीर बाबू का परिवार भी निगम चुनाव में हार  के बावजूद मैदान में सक्रिय है.  रामधीर सिंह फिलहाल आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.  उनके पुत्र  शशि सिंह कोयला कारोबारी सुरेश सिंह हत्याकांड में फरार घोषित हैं.  बावजूद घर की महिलाओं ने मोर्चा संभाल रखा है.  रामधीर सिंह की पत्नी इंदू देवी निगम चुनाव में उम्मीदवार थी, हालांकि चुनाव वह हार गई.  लेकिन उनकी सक्रियता अभी बनी हुई है.   

    श्रीमती इंदू  देवी और आसनी सिंह की ओर से दी गई है बधाई 

    श्रीमती इंदू  देवी और उनकी पुत्रवधू आसनी सिंह की ओर से अखबारों में विज्ञापन दिया गया है, जो यह संकेत करता है कि चुनावी मैदान में आगे भी सक्रियता बनी रहेगी।  कहा गया है कि जन सेवा का संकल्प अटल है, कदम आगे ही बढ़ेंगे, आपका स्नेह ही मेरी पहचान है.  जन सेवा ही मेरा सम्मान है.  जीत- हार तो लोकतंत्र का भाग है, पर धनबाद ही मेरी जान है.  आगे कहा गया है कि इस चुनाव में आप सभी ने जो  समर्थन और आशीर्वाद मुझे दिया, उसके लिए मैं दिल की गहराइयों से आभारी हूं, अपने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लिया, यह  हमारे शहर की जागरूकता और मजबूती का प्रतीक है.  लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता हैं.  मैं इस जनादेश को पूर्ण विनम्रता और सम्मान के साथ स्वीकार करती हूं, मैं अपने सभी समर्थित कार्यकर्ताओं, पदाधिकारी, समर्थकों एवं शुभचिंतकों का विशेष धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने पूरे समर्पण और निष्ठा के साथ इस अभियान को मजबूती दी. 
     
    आपका परिश्रम और विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत है
     
    आपका परिश्रम और विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत है.  मैं नवनिर्वाचित महापौर एवं पार्षदों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देती  हूं और आशा करती हूं कि उनके नेतृत्व में धनबाद विकास की नई दिशा तय करेगा।  जन सेवा का मेरा संकल्प आगे भी निरंतर जारी रहेगा, यह विज्ञापन श्रीमती इंदु देवी और आसनी सिंह ने जारी किया है.  इसी तरह भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने भी धनबाद की जनता को धन्यवाद दिया है, तो झामुमो  में समर्थित उम्मीदवार शेखर अग्रवाल ने भी जनता का धन्यवाद किया है.  जेएलकेएम समर्थित  प्रत्याशी भी नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह से मुलाकात की है.  सिंह मेंशन में पार्षदों का आना-जाना लगा हुआ है.  राजनीतिक पंडित मानते हैं कि धनबाद की राजनीति अब अलग ढंग से चलेगी, पावर सेंटर का विकेंद्रीकरण होगा ,लेकिन इसके लिए कुछ समय इंतजार करना होगा। 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

     


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