धनबाद और रांची पुलिस की परेशानी एक जैसी, एक मेजर से परेशान तो दूसरी मयंक सिंह की कर रही खोज

    धनबाद और रांची पुलिस की परेशानी एक जैसी, एक मेजर से परेशान तो दूसरी मयंक सिंह की कर रही खोज

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद पुलिस की तरह ही रांची पुलिस भी परेशान है. धनबाद पुलिस प्रिंस खान के गुर्गे मेजर  को ढूंढ रही है तो रांची पुलिस अमन साव के गुर्गे मयंक सिंह को ढूंढ रही है. धनबाद पुलिस भी इस नतीजे पर पहुंची है कि मेजर कोई छद्म नाम है. चर्चित हो जाने के कारण उसी के नाम पर धमकी दी जाती है. और पर्चा वायरल कराया जाता है. इसी तरह रांची पुलिस भी लगभग इसी निष्कर्ष पर पहुंची है कि मयंक सिंह कोई छद्म नाम है और चर्चित हो जाने के कारण अमन साव गिरोह के लोग मयंक सिंह के नाम का उपयोग करते हैं. असलियत में मयंक सिंह कोई व्यक्ति नहीं है. मयंक सिंह के नाम का इस्तेमाल करने वाले कई लोग झारखंड के विभिन्न जगहों से गिरफ्तार किए गए हैं.

    रांची पुलिस के लिए अमन साव सहित अन्य गिरोह बना चुनौती

    पुलिसिया मानकर चल रही है कि मयंक सिंह नाम का खौफ बन चुका है, इसी कारण से उसके नाम से अमन साव ही अपने गिरोह के सदस्यों से फोन करवाता है. जिस तरह धनबाद में प्रिंस खान गिरोह और अमन सिंह गिरोह पुलिस के लिए चुनौती बने हुए है, उसी तरह से रांची पुलिस के लिए अमन साव सहित अन्य गिरोह भी चुनौती बने हुए है. रांची में कोयला कारोबारी रंजीत गुप्ता पर फायरिंग व हजारीबाग में ऋत्विक कंपनी शरत बाबू की हत्या के बाद अमन साव गिरोह की जांच में जुटी पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं. पुलिस ने अमन साव और मयंक सिंह के नाम पर आने वाले इंटरनेट कॉल की जांच की तो पाया गया कि सभी कॉल मलेशिया से किए जा रहे हैं. फेसबुक पर मयंक सिंह के नाम पर दहशत फैलाने वाले नंबर की जांच की गई तो पुलिस को पता चला कि यह मोबाइल नंबर दुमका जेल लोकेशन में सक्रिय है. अमन साव फिलहाल दुमका जेल में ही है. पुलिस अधिकारियों को यह भी अंदेशा है कि अमन साव के द्वारा खुद ही इस मोबाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है.

    बिहारी लाल चौधरी प्रतिष्ठान पर फायरिंग मामले में जांच शुरू

    इधर गोविंदपुर में बिहारी लाल चौधरी प्रतिष्ठान पर फायरिंग के मामले में गोविंदपुर पुलिस ने दो अज्ञात लोगों पर f.i.r. कर जांच शुरू कर दी है. वैसे धनबाद पुलिस भी मेजर के नाम से परेशान है. अपने को मेजर कहने वाले कई लोगों को धनबाद पुलिस भी जेल भेज चुकी है, बावजूद मेजर का पर्चा अभी भी वायरल हो रहा है. पर्चा वायरल करने वालों तक पुलिस पहुंचने की लगातार कोशिश कर रही है. पुलिस यह मान कर चल रही है कि मेजर नाम का कोई व्यक्ति अस्तित्व में नहीं है. चर्चा में आ जाने के कारण इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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