धनबाद: चाहे आप कितने भी लीवर के ताले लगा ले,चोर दिन दोपहर कर ले रहे हाथ साफ 

    धनबाद: चाहे आप कितने भी लीवर के ताले लगा ले,चोर दिन दोपहर कर ले रहे हाथ साफ 

    धनबाद (DHANBAAD) : धनबाद में आए दिन लगातार चोरी की घटनाए सामने आ रही है. पहली जनवरी को बापू नगर में बंद आवास का ताला तोड़कर 5 लाख की चोरी, 23 जनवरी को कुसुम बिहार में बंद  घर से लाखों की चोरी, 16 फरवरी को जोड़ा फाटक बिजली बोर्ड कॉलोनी में बंद घर का ताला तोड़कर आठ लाख की चोरी, 4 अप्रैल को बरमसिया काली मंदिर के समीप 8 लाख की चोरी, 15 अप्रैल को जोड़ा फाटक सुरेंद्र गली में बंद आवास का ताला तोड़कर  चोरी, 15 अप्रैल को ही विनोद नगर में बंद आवास का ताला तोड़कर सात लाख की चोरी. 20 अप्रैल को राहरगोडा में चिकित्सक के आवास का ताला तोड़कर 10 लाख की चोरी, 13 मई को न्यू कार्मिक नगर में घर का ताला तोड़कर 10 लाख की चोरी, यह तो वह आंकड़े हैं जो सामने आए हैं. इसके अलावा भी ऐसी कई घटनाएं हुई है ,जहां चोरों ने तपती दोपहरी में घर का ताला तोड़कर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है. तो क्या कहा जा सकता है कि धनबाद शहर में चोरी का ट्रेंड बदल गया है.  

    मार्च और अप्रैल में सर्वाधिक चोरियां

    पहले जहां ठंड के मौसम में अधिकतर चोरियां होती थी ,वही अब गर्मी के मौसम में चोरी की वारदात में इजाफा हुआ है. जनवरी से लेकर अब तक जिले में चोरी की 90 घटनाएं पुलिस में दर्ज हुई है. मार्च और अप्रैल में सर्वाधिक चोरियां हुई हैं. चोरी का तरीका कमोबेश एक ही जैसा है. बंद घरों पर आप कितने भी लीवर के ताले क्यों न लगा लें, चोरी की घटनाएं नहीं रुक रही है. परेशान करने वाली बात यह है कि कई घरों में तब चोरी हुई है, जब घरवाले घंटे 2 घंटे के लिए बाहर गए हैं .पिछले 3 सालों के आंकड़े पर गौर करें तो 2021 मैं 42, 2022 में 62 जबकि 2023 में अब तक 90 घरों में चोरी की घटनाएं दर्ज हुई है. यह घटनाएं हर  साल के जनवरी से लेकर मई महीने के बीच की है .पुलिस के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिसे यह पता लगा या जा सके कि चोरी की घटनाओं में कौन सा गैंग सक्रिय है .यह बात सही है कि गैंग सिर्फ लोकल ही नहीं है बल्कि दूसरे जिले से भी अपराधी यहां पहुंच रहे हैं और लोकल लिंक की मदद से घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. 

    पुलिसिंग की व्यवस्था कमजोर

    यह बात भी सही है कि धनबाद पुलिस का मुखबिर सिस्टम कमजोर हो गया है. इस वजह से घटनाएं तो हो रही है लेकिन उनके खुलासे भी नहीं हो पा रहे हैं. अपराधियों की कुंडली जब तक पुलिस के पास नहीं होगी ,घटनाओं को रोकना संभव नहीं है.  थानेदारों का मुखबिर सिस्टम भी कमजोर हो गया है. जेल से बाहर आने वाले अपराधियों की कुंडली भी थानेदार नहीं रख पाते हैं. यह बात सही है कि पुलिस हर जगह मौजूद नहीं रह सकती लेकिन उनकी नजर हर जगह होनी चाहिए. इसलिए भी तो कहा जाता है कि थानेदार अगर चाहे तो उसके थाना क्षेत्र में एक सुई की चोरी का भी पता चल सकता है. मोहल्ले में पुलिसिंग की व्यवस्था भी कमजोर दिखती है. पेट्रोलिंग सिस्टम भी शहर की मुख्य सड़कों से बाहर नहीं निकल  पाती. नतीजा है कि चोरों की पौ बारह है और लोग परेशान हैं.

    रिपोर्ट : धनबाद ब्यूरो 


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