धनबाद नगर निकाय चुनाव: वकीलों की हड़ताल से नामांकन प्रक्रिया सुस्त, नामांकन केंद्र से मायूस लौट रहे प्रत्याशी

    Dhanbad news:कोयलांचल धनबाद में नगर निकाय चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी तो तेज है, लेकिन नामांकन केंद्रों पर अभी वह उत्साह नजर नहीं आ रहा है जिसकी उम्मीद की जा रही थी. 29 जनवरी से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के शुरुआती दो दिनों के भीतर नामांकन की रफ्तार बेहद धीमी दर्ज की गई है.ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दो दिनों के भीतर जिले में महज तीन प्रत्याशियों ने ही अपने नामांकन पत्र दाखिल किए है

    धनबाद नगर निकाय चुनाव: वकीलों की हड़ताल से नामांकन प्रक्रिया सुस्त, नामांकन केंद्र से मायूस लौट रहे प्रत्याशी

    धनबाद(DHANBAD):कोयलांचल धनबाद में नगर निकाय चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी तो तेज है, लेकिन नामांकन केंद्रों पर अभी वह उत्साह नजर नहीं आ रहा है जिसकी उम्मीद की जा रही थी. 29 जनवरी से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के शुरुआती दो दिनों के भीतर नामांकन की रफ्तार बेहद धीमी दर्ज की गई है.ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दो दिनों के भीतर जिले में महज तीन प्रत्याशियों ने ही अपने नामांकन पत्र दाखिल किए है.समाहरणालय परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है और जो प्रत्याशी नामांकन के लिए पहुँच भी रहे है, वे जरूरी दस्तावेज़ पूरे न होने के कारण मायूस होकर वापस लौट रहे है.

    उम्मीदवार कागजी प्रक्रिया के लिए इधर-उधर भटकते देखे गए

    हालांकि, नामांकन पत्र खरीदने वालों की संख्या काफी अधिक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रत्याशी चुनाव लड़ने की तैयारी में तो है लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण पर्चा दाखिल करने से बच रहे है.अब तक महापौर पद के लिए 23, चिरकुण्डा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए 10 और वार्ड पार्षद पद के लिए रिकॉर्ड 139 नामांकन पत्रों की बिक्री हो चुकी है.भारी संख्या में फॉर्म बिकने के बावजूद वास्तविक नामांकन का आंकड़ा दहाई तक भी नहीं पहुँच पाया है.नामांकन केंद्र पर आने वाले कई संभावित उम्मीदवार कागजी प्रक्रिया के लिए इधर-उधर भटकते देखे गए, लेकिन वकीलों के सहयोग के अभाव में उन्हें अंततः खाली हाथ वापस जाना पड़ रहा है.

    निराशा का सबसे बड़ा कारण चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल

    इस सुस्ती और प्रत्याशियों की निराशा का सबसे बड़ा कारण जिले में चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल को माना जा रहा है.नामांकन पत्र के साथ जमा किए जाने वाले अनिवार्य शपथ-पत्र (एफिडेविट) और अन्य कानूनी दस्तावेजों को तैयार करने में वकीलों की भूमिका अहम होती है, लेकिन हड़ताल की वजह से प्रत्याशियों को कानूनी सहायता नहीं मिल पा रही है.यही कारण है कि लोग फॉर्म खरीदने और उत्साह दिखाने के बावजूद उसे आधिकारिक तौर पर जमा करने की स्थिति में नहीं हैं और केंद्रों से मायूस होकर वापस लौट रहे है.

    प्रत्याशियों की मुश्किलें और बढ़ सकती है

    प्रशासनिक शेड्यूल के अनुसार नामांकन करने की अंतिम तिथि 4 फरवरी निर्धारित की गई है.यदि आने वाले दिनों में वकीलों की हड़ताल समाप्त नहीं होती है, तो प्रत्याशियों की मुश्किलें और बढ़ सकती है.वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि अंतिम तारीख के करीब नामांकन केंद्रों पर भारी भीड़ जुट सकती है, क्योंकि अब उम्मीदवारों के पास अपना पर्चा दाखिल करने के लिए महज कुछ ही दिनों का समय शेष बचा है.

    रिपोर्ट-नीरज कुमार


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