धनबाद लोकसभा:जीत या हार जिसकी भी हो लेकिन विवाद से पिंड नहीं छूटेगा,पढ़िए क्या होगी इसकी वजह

    धनबाद लोकसभा:जीत या हार जिसकी भी हो लेकिन विवाद से पिंड नहीं छूटेगा,पढ़िए क्या होगी इसकी वजह

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद लोकसभा सीट से कोई भी जीते  लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव परिणाम के बाद भी विवाद और अधिक बढ़ेगा. अगर भाजपा धनबाद से जीत भी जाती है तब भी विवाद रुकेगा नहीं. नए ढंग से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू होगा.यह अलग बात है कि सभी लोग परिणाम की प्रतीक्षा करेंगे.पार्टी की ओर से विधायक राज सिन्हा को मिला नोटिस इसका मुख्य कारण बताया जाता है .

    विधायक राज सिन्हा ने क्या कहा

    यह अलग बात है कि विधायक राज सिन्हा का भी अपना पक्ष है. वह साफ कह रहे हैं कि पार्टी को गलत फीडबैक दिया गया है. उनके बारे में गलत जानकारी पार्टी को दी गई है. वह यह भी कह रहे हैं कि पार्टी को कोई गलतफहमी हो गई है .मैं तो बूथ  कमेटी और शक्ति केंद्रों की बैठक में लगातार रहा हूं. पार्टी प्रत्याशी ढुल्लू महतो के नॉमिनेशन में भी था. उनके साथ दो मंडल की बैठक में भी रहा. मैं खुद ढुल्लू महतो जिंदाबाद के नारे भी लगाए. लेकिन परेशानी यह है कि चुनाव प्रबंधकों ने मुझे किसी काम में लगाया ही नहीं. ना मुझे पार्टी के किसी कार्यक्रम की जानकारी दी जाती है और नहीं बुलाया जाता है. विधायक ने यह भी कहा है कि वह अपना जवाब पार्टी को भेज देंगे. यह तो हुई नोटिस की बात लेकिन अगर धनबाद से भाजपा की जीत हो भी जाती है तो विवाद पिंड नहीं छोड़ेगा. क्योंकि जो लोग आज इग्नोर किए जा रहे हैं, वह लोग ढुल्लू महतो के इस भाषण पर कार्रवाई की मांग करेंगे कि सांसद, विधायक अपराधी से पैसे लेते हैं. डरपोक हैं. हालांकि सवाल यह भी उठने लगे हैं कि पार्टी आखिर इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की.

     सरयू राय ने  भाजपा पर कसा तंज 

    इधर, विधायक सरयू राय ने इस मामले को लेकर भाजपा पर तंज किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि दुखद आश्चर्य है कि जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल जी के कथन पर धनबाद विधायक राज सिन्हा को प्रदेश भाजपा ने  नोटिस दिया है. उन्होंने बोकारो में सभा के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी कुछ सवाल किए हैं. यह बात अलग है कि लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर भीतर घात चल रही है. पार्टी ने कई सीटों पर प्रत्याशी बदले ,उसके बाद विवाद को ऑक्सीजन मिलनी शुरू हुई और यह अब सतह पर आ गया है. हजारीबाग के निवर्तमान सांसद जयंत सिन्हा और धनबाद के विधायक राज सिन्हा को नोटिस मिलना इसके प्रमाण है. हजारीबाग के निर्वतमान सांसद जयंत सिन्हा ने खुद को चुनाव प्रचार से अलग रखा. पार्टी प्रत्याशी मनीष जायसवाल के पक्ष में किसी अभियान में शामिल नहीं हुए. जयंत सिन्हा के बेटे इंडिया गठबंधन की रैली में शामिल हुए. चर्चा तो यह भी है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने हजारीबाग जाकर यशवंत सिन्हा और जयंत सिन्हा के बेटे से मुलाकात की. सोमवार को हुए हजारीबाग के चुनाव में जयंत सिन्हा ने मतदान में भी हिस्सा नहीं लिया. धनबाद के भाजपा विधायक को भी नोटिस दी गई है. यह अलग बात है कि धनबाद के भाजपा विधायक धनबाद से टिकट के दौड़ में शामिल थे. कुछ अन्य सीटों पर भी यही स्थिति है. लेकिन मामला अभी सतह पर नहीं आया है.

    इसके बाद राजनीतिक पंडित यह मान रहे हैं कि भाजपा अगर झारखंड में बेहतर प्रदर्शन करती है फिर भी विवाद बना रहेगा. क्योंकि जो लोग आज शंका की निगाह से देखे जा रहे हैं, वह लोग पार्टी पर दबाव बनाएंगे की गलत सूचना प्रेषित करने वालों को चिन्हित कर अब उन पर कार्रवाई की जाए. वैसे धनबाद सीट टिकट बंटने के पहले भी हॉट सीट बनी हुई थी और टिकट बांटने के बाद भी हॉट सीट बनी हुई है. धनबाद तो चुनाव परिणाम के बाद भी विवाद के केंद्र में रहेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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