DHANBAD: किन्नर समाज अपने लिए नहीं तो किनके लिए पूजता है छठी मईया को जानिए


धनबाद(DHANBAD): उदीयमान सूर्य को सोमवार को अर्ध्य दिया गया. इसके साथ ही महापर्व का समापन हो गया. सोमवार को दामोदर नद के घाट पर व्रतियों की भीड़ जुटी हुई थी. व्रतियों के इसी भीड़ में जामाडोबा का किन्नर समाज भी शामिल था. यह समाज भी पूरी आस्था, श्रद्धा और भक्ति के साथ छठ मैया की पूजा के साथ भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया. यह किन्नर समाज छठ व्रत खुद के लिए नहीं करता, इनके यजमान खुशहाल रहे, उनकी समृद्धि बढ़े, उनका परिवार बढ़े, जिला, देश और प्रदेश का कल्याण हो, इसके लिए यह समाज छठ व्रत करता है. पूरा समाज छठी मैया के पूजा में लीन हो जाता है और इसकी तैयारी पहले से ही शुरु कर दी जाती है.
छमछम देवी पिछले 50 सालों से छठ व्रत कर रही थी
किन्नर समाज के प्रदेश अध्यक्ष छमछम देवी पिछले 50 सालों से छठ व्रत करती आ रही थी लेकिन अब वृद्ध हो गई है. छठ नहीं कर पा रही हैं तो उनके शिष्यों ने इस साल से यह बीड़ा उठाया है. छठी मैया से विनती की है कि यह सिलसिला उनका आगे भी चलता रहे. सोमवार की सुबह यह समाज गाजे-बाजे के साथ घाट पंहुचा. श्रद्धालुओं के बीच एक अलग ही भक्ति की समां बंध गई. उस समय पूरे घाट पर एक अलग ही छटा बिखर रही थी. किन्नर समाज का उत्साह और उमंग देखने लायक था. छठ घाट पर पहुंची श्वेता किन्नर और सोनम किन्नर ने कहा कि छमछम दादी वृद्ध हो गई है. वह आने में असमर्थ हैं ,इसलिए यह काम अब हम लोगों ने शुरू किया है.
कोयलांचल में था उत्साह का माहौल
व्रत कर वह यजमान, दाता के लिए छठी माई से दुआ करते हैं कि उनके बाल बच्चे स्वस्थ रहें, घर -संसार बढ़ता रहे, उन्हें आर्थिक समृद्धि आये. दोनों ने कहा कि आगे भी वह लोग अपने यजमानो के लिए ,अपने दाताओं के लिए छठी माई की पूजा करती रहेंगी.दो साल तक बीमारी की मार झेलने के बाद इस साल कोयलांचल में यह पर्व विशेष उत्साह और उमंग के साथ पूरा हुआ.
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