देव भूमि : अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार क्यों उबल रही उत्तराखंड, पढ़िए-इन साइड स्टोरी !


धनबाद (DHANBAD) : शांत प्रकृति का उत्तराखंड उबल रही है. उत्तराखंड में चल रहा आंदोलन भाजपा के लिए गले की फांस बनता जा रहा है. इस मामले को जितना भटकाने की कोशिश की जा रही है, आंदोलन उतना ही तीखा होता जा रहा है. कथित तौर पर भाजपा के एक बड़े नेता के खिलाफ सीबीआई जांच को लेकर यह आंदोलन शुरू हुआ है. दरअसल, उत्तराखंड में एक 19- 20 साल की युवती अंकिता भंडारी की 3 साल पहले हत्या हुई थी. इस मामले में तीन आरोपियों को सजा होने के कई महीने बाद नए आरोप सामने आए है. यह आरोप एक ऑडियो वायरल होने के बाद लगने शुरू हुए. इसके बाद से कांग्रेस, वामपंथी दल सहित विपक्षी दल और वहां के लोग सीबीआई जांच की मांग कर रहे है. उत्तराखंड सरकार इस पर कोई स्पष्ट निर्देश देने से बच रही है. दावा किया जा रहा है कि अंकिता भंडारी की हत्या वाले दिन रिसोर्ट में एक वीआईपी मौजूद था.
उत्तराखंड सरकार आखिर क्यों है आंदोलनकारियों के निशाने पर
आरोप है कि किसी वीआईपी को बचाने के लिए भाजपा सरकार सीबीआई जांच कराने से बच रही है. हालांकि हत्याकांड के बाद एसआईटी का गठन हुआ था और एसआईटी ने इस मामले का खुलासा कर देने का दावा किया था. एसआईटी ने कहा है कि इस मामले में वह किसी प्रभावशाली नेता की संलिप्तता का पता नहीं लगा सकी है. ताज्जुब है इस मामले में भाजपा के लोग भी जांच की वकालत कर रहे हैं. इसलिए यह मामला चर्चा में आ गया है. कहा जा रहा है कि अगर इसकी जांच नहीं हुई और बेटियों के साथ अन्याय जारी रहा तो कोई भी अपने को देवभूमि का निवासी कैसे कह सकता. इधर, आंदोलन के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा कि अंकिता हत्याकांड की जांच से किसी को भी नहीं बचाया गया है और न भविष्य में किसी को बचाया जाएगा. उन्होंने कहा कि वह अंकिता के माता-पिता से मिलेंगे और उनकी बेटी के लिए न्याय दिलाने के लिए उनकी मांगों के अनुसार कार्रवाई करेंगे. बता दें कि अंकिता भंडारी ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी. काम शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद उसकी हत्या कर दी गई.
लापता होने के कई दिनों बाद मिला था शव, फिर क्या हुआ ?
उसके लापता होने के कई दिन बाद शव मिला था. राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम ने अंकिता भंडारी हत्या की जांच की और पाया कि उसे जबरन यौन सेवाएं देने के लिए मजबूर किया जा रहा था. जिसका वह विरोध कर रही थी और इसी वजह से उसकी हत्या की गई थी. बता दें कि उत्तराखंड में अंकित भंडारी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था. 18 सितंबर 2022 को अंकिता भंडारी की हत्या की गई थी और उसकी लाश 24 सितंबर को मिली थी, फिर 3 साल 4 महीने के बाद मई 2025 में अदालत ने भाजपा नेता के पुत्र पुलकित आर्य, उसके सहयोगी अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. सवाल यह है कि अगर इस मामले में अंकिता भंडारी को इंसाफ मिल चुका था तो उम्र कैद के 8 महीने बाद जनता उत्तराखंड की सड़कों पर क्यों उतर गई है?
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
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