तीन -तीन बेटे रहने के बाद भी 84 वर्षीय वृद्ध महिला गांव के मंदिर में रहने को हुई मजबूर, जानिए पूरी कहानी

    तीन -तीन बेटे रहने के बाद भी 84 वर्षीय वृद्ध महिला गांव के मंदिर में रहने को हुई मजबूर, जानिए पूरी कहानी

    बोकारो(BOKARO): हिंदी फिल्म का एक बहुत ही खूबसूरत डायलॉग है- न मेरे पास पैसा है, न बंगला है और न बैंक बैलेंस है, मेरे पास मां है. फिल्म में एक्टर के द्वारा बोले गए डायलॉग के जरिए ये बताने की कोशिश की गई है कि अगर आपके पास मां है तो, आप गरीब होते हुए भी सबसे बड़े अमीर हैं. मगर फिल्म का ये मशहूर डायलॉग सिर्फ फिल्मों में ही अच्छी लगती दिखाई पड़ती है, क्योंकि वास्तविक जिंदगी में हकीकत कुछ और ही हैं.

    गांव के एक मंदिर में रहने को मजबूर वृद्ध मां 

    ऐसी ही एक हकीकत कहानी सामने आई है, जहां तीन-तीन बेटो का भरा-पूरा परिवार रहने के बावजूद एक वृद्ध मां जिसकी उम्र लगभग 84 वर्ष है, गांव के एक मंदिर में रहने को मजबूर हैं. मंदिर के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की दया पर वृद्धा की जिंदगी किसी तरह कट रही है.

    आपको बता दें कि ये सच्चाई बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड के साड़म पूर्वी पंचायत स्थित बूटबरिया गांव निवासी लक्ष्मी देवी की है. लगभग 84 वर्षीय वृद्ध महिला लक्ष्मी देवी तीन-तीन बेटे रहने के बावजूद अपने ही गांव के मनसा देवी के मंदिर में रहने को मजबूर हैं. लक्ष्मी देवी मंदिर के दरवाजे पर टकटकी भरी निगाहों से अपने बेटों की आने की राह देखती रहती है. लक्ष्मी देवी की ऐसी हालत देखकर बेटों का दिल तो नही पसीजा, लेकिन गांव वाले का दिल जरूर पसीज गया. बारी-बारी से गांव वाले इनके लिए खाने की व्यवस्था कर देते हैं.

    बेटे ने मां को घर से निकाल दिया

    जानकारी के अनुसार लक्ष्मी देवी,बूटबरिया ग्राम निवासी स्व0 शालिग्राम राम की पत्नी थी. पति रेलवे में नौकरी करते थे. पति की मृत्यु के बाद इन्हें पेंशन मिलने लगी. पेंशन की राशि भी इनके पुत्र  हड़प लेते हैं. लक्ष्मी देवी का बड़ा पुत्र आईईएल अस्पताल में नौकरी करते थे, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं. दूसरा पुत्र भी रेलवे से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. तीसरा पुत्र भी है, जिसकी पत्नी आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका के पद पर कार्यरत हैं. लक्ष्मी देवी अपने बड़े पुत्र के साथ कई वर्षों तक रही, उसके बाद उनका तीसरा पुत्र उसे अपने साथ हजारीबाग ले गया. वर्तमान में अभी तीसरा पुत्र भी उसे अपने घर से निकाल दिया है.

    गांव वालों की दया पर अपनी जिंदगी काट रही बूढी मां

    ग्रामीणों के अनुसार लक्ष्मी देवी को लगभग बीस हजार रुपये पेंशन से मिलती है. पेंशन से मिले हुए रुपये का सारा पैसा उसका छोटा पुत्र रख लेता है. वो पुत्र लक्ष्मी देवी को मुश्किल से एक-दो हजार रुपए देकर बाकी सारे पैसे रख लेता है. इधर लगभग बीस दिनों पूर्व उसका तीसरा पुत्र मां लक्ष्मी देवी को गांव लाकर छोड़ देता है. गांव में लक्ष्मी देवी का कोई मकान भी नही है, जो मकान था भी,वह भी गिर चुका है. वर्तमान समय में बेटे के द्वारा छोड़े जाने के बाद लक्ष्मी देवी गांव के मनसा देवी के मंदिर में रह रही है,और गांव वालों की दया पर अपनी जिंदगी काट रही हैं.

    बोकारो, गोमिया से संजय कुमार की रिपोर्ट,


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