सीएम हेमंत सोरेन ने बिरसा मुंडा के वंशज को दी श्रद्धांजलि, परिवार को हर संभव मदद करने का दिया भरोसा

    सीएम हेमंत सोरेन ने बिरसा मुंडा के वंशज को दी श्रद्धांजलि, परिवार को हर संभव मदद करने का दिया भरोसा

    रांची(RANCHI): धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के वंशज मंगल मुंडा का आज निधन हो गया है. मंगल मुंडा के निधन पर उनके गांव उलिहातू में मातम पसरा हुआ है. वहीं, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राज्य के सीएम हेमंत सोरेन व बाबूलाल मरांडी समेत कई बड़े नेताओं ने मंगल मुंडा के निधन पर शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स पहुंचकर दिवंगत मंगल मुंडा के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि अर्पित की. साथ ही सीएम ने दिवंगत मंगल मुंडा के परिजनों को सांत्वना देते हुए राज्य सरकार के स्तर से हर संभव मदद करने का भरोसा भी दिलाया.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर लिखा है कि, “भगवान बिरसा मुंडा जी के वंशज मंगल मुंडा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. उनका जाना उनके परिवार के साथ ही झारखंड के जनजातीय समाज के लिए भी अपूरणीय क्षति है. शोक की इस घड़ी में ईश्वर उनके परिजनों को संबल प्रदान करे. ओम शांति!”

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर शोक जताते हुए लिखा है कि, “रिम्स में इलाजरत भगवान बिरसा मुंडा के वंशज श्री मंगल मुंडाजी के निधन की खबर से अत्यंत दुखी हूं. मरांग बुरू दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिवारजनों को दुख की यह विकट घड़ी सहन करने की शक्ति दे.”

    वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया एक्स पर शोक जताते हुए कहा कि, “धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के परपोते मंगल मुंडा जी का असामयिक निधन अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है. सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जिस तरह से उन्हें इलाज के लिए तड़पना पड़ा, वह हमारी व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है. इतनी नाजुक स्थिति में भी उन्हें समय पर ट्रॉमा सेंटर में बेड नहीं मिला. इलाज शुरू करने में 10 घंटे की देरी हुई. परिजनों को ₹15,000 की दवाएं भी खुद खरीदनी पड़ीं. अबुआ सरकार में एक गरीब आदिवासी की जिंदगी की कीमत आज बस इतनी ही रह गई है. यह केवल मंगल मुंडा जी की मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था के द्वारा उनकी हत्या है. जिस झारखंड को बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलना चाहिए था, वहां उनके वंशज के साथ ऐसा व्यवहार होना हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख देता है. क्या आज हमारी सरकार और व्यवस्था में गरीबों की कोई जगह नहीं बची है? यह सवाल सिर्फ मंगल मुंडा के परिवार का नहीं, बल्कि झारखंड के हर गरीब आदिवासी का है.


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