जामताड़ा(JAMTARA): जिले में ठगों ने ठगी का एक नया और बेहद शातिर तरीका अपनाया है, जिसने ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मचा दिया है. इस बार अपराधियों के निशाने पर आंगनबाड़ी सेविकाएं और उनसे जुड़ा संवेदनशील सरकारी डेटा है. नारायणपुर प्रखंड के सिकदारडीह गांव से सामने आए इस मामले ने डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है.
घटना का खुलासा तब हुआ जब सिकदारडीह आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका ललिता देवी के मोबाइल नंबर पर एक अनजान कॉल आई. कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को नारायणपुर ब्लॉक का डॉक्टर बताते हुए बेहद भरोसेमंद और आधिकारिक अंदाज में बातचीत शुरू की. उसने दावा किया कि सरकार अब सभी लाभार्थियों को सीधे बैंक खाते में भुगतान करने जा रही है, जिसके लिए तत्काल सत्यापन आवश्यक है.
इसके बाद ठग ने ललिता देवी से लाभार्थियों के बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर और फोनपे या गूगल-पे के QR कोड जैसी संवेदनशील डिटेल्स मांगनी शुरू कर दी. लोगों का विश्वास जीतने के लिए उसने गांव के कुछ अन्य लोगों को भी कॉन्फ्रेंस कॉल में जोड़ दिया, ताकि यह पूरी प्रक्रिया किसी आधिकारिक सरकारी कार्रवाई जैसी लगे.
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि ठग के पास पहले से ही आंगनबाड़ी सेविकाओं के संपर्क नंबरों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं की जानकारी, बच्चों की जन्म तिथि और राशन वितरण से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड मौजूद था. इतनी सटीक जानकारी की मदद से उसने आसानी से भरोसा बनाने की कोशिश की. इससे ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं न कहीं सरकारी डेटा सिस्टम से बड़ी सेंधमारी या डेटा लीक हुआ है.
हालांकि, ललिता देवी ने सतर्कता दिखाते हुए किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया और अन्य सेविकाओं को भी तुरंत इस ठगी की जानकारी देकर सचेत किया. उन्होंने साफ कहा कि कोई भी सरकारी विभाग फोन पर बैंक डिटेल, QR कोड या UPI पिन जैसी जानकारी नहीं मांगता.
घटना के बाद प्रखंड कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से ऐसी कोई भी जानकारी फोन पर नहीं ली जाती है. वहीं, जामताड़ा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें. पुलिस ने कहा है कि इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है.

