धनबाद(DHANBAD) | संकट के दौर के बीच पेट्रोल पम्पों के सामने नई तरह की परेशानी आ गई है. उनके 5 दिन की क्रेडिट फैसिलिटी को बंद कर दिया गया है. नतीजा है कि अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. अब तक जिन उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंपों से उधार पेट्रोल- डीजल दिए गए थे, अब उसकी वसूली पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. पेट्रोल पंपों को नगद तेल खरीदने को कहा गया है. बता दें कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड से पहले उन्हें 5 दिनों की क्रेडिट फैसिलिटी मिलती थी. पम्प वाले कारोबारी तेल बेचकर पैसे का भुगतान करते थे और फिर नया अलॉटमेंट लेते थे. लेकिन अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे।
केवल छोटे उपभोक्ता ही तेल नहीं लेते ,बड़े -बड़े भी खरीदते हैं
यहां यह बताना जरूरी है कि पेट्रोल पंपों से तेल की खरीदारी केवल छोटे-मोटे उपभोक्ता ही नहीं करते हैं. बल्कि कोयला खनन कार्यों और ट्रांसपोर्टिंग में भी पेट्रोल पंपों की भूमिका होती है. यहां से तेल लेकर खनन कार्य में लगी कंपनियां काम करती हैं. रोड सेल से कोयले की ढुलाई भी होती है. यह अलग बात है कि बड़ी-बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियां सीधे कंपनी से तेल खरीदती हैं और उनकी अपनी एक अलग व्यवस्था होती है. उन पर तो इसका कोई असर नहीं होगा, लेकिन छोटे-छोटे कारोबारी परेशान हो जाएंगे।
पावर प्लांटों को भी नुकसान होने से बिजली संकट बढ़ेंगी
पावर प्लांटों को भी नुकसान होगा। जिनके पास रोड से कोयला पहुंचता है, उनको परेशानी हो सकती है. कोयले का शॉर्टेज हो सकता है. झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने धनबाद मंडल के विक्रय पदाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि 5 दिन की क्रेडिट सुविधा वापस ले ली गई है. उन्होंने कहा है कि सभी जानते हैं कि रिटेल आउटलेट यानी पेट्रोल पंप से तेल लेकर खनन कार्य तथा कोयला ढुलाई किया जाता है. पहले उधार तेल मिलता था, लेकिन अचानक इस सुविधा को वापस लेने की वजह से पूरा सप्लाई -चेन बिगड़ जाएगा।
पेट्रोल पम्पों का पुराना बकया भी फंसने का खतरा रहेगा ---
ऐसा हुआ तो कई पेट्रोल पंप या तो बंद हो जाएंगे या बैंक का कर्ज उनके ऊपर बढ़ जाएगा। उन्होंने मांग की है कि 5 दिन के क्रेडिट फैसिलिटी को फिर से बहाल किया जाए. वैसे जहां-जहां खनन प्रदेश हैं, वहां यह व्यवस्था पेट्रोल पंपों के लिए संकट पैदा करेगी। पेट्रोल पम्पों का संचालन सिर्फ छोटे उपभोक्ताओं की खरीदारी से नहीं होता है, कुछ बड़े-बड़े ट्रांसपोर्टर, खनन कार्य में लगी कंपनियां उधार में डीजल लेती हैं और समय के अनुसार भुगतान करती हैं. अब जब पेट्रोल पंपों को क्रेडिट नहीं मिलेगा, तो वह भी नगद तेल बेचेंगे, ऐसे में उनका पुराना बकाया फंस सकता है.
पंप मालिकों ने सरकारी विभागो से की बकाये भुगतान की मांग ---
इधर ,पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि सिर्फ कंपनियों के पास ही बकाया नहीं है, बल्कि झारखंड के सभी जिलों में सरकारी विभाग के पास भी पेट्रोल पम्पों का का भारी बकाया है. इनमें जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, अनुमंडल कार्यालय, अंचल कार्यालय, थाना सहित अन्य विभाग शामिल हैं. इन विभागों के पास बकाया राशि बड़ी है. झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा है कि उनकी मांग है कि सरकारी विभाग जल्द से जल्द बकाए का भुगतान करें। साथ ही हर सप्ताह भुगतान की प्रक्रिया को सुनिश्चित की जाए. जिससे कि पेट्रोल पंपों का संचालन हो सके अन्यथा झारखंड के कई पेट्रोल पंपों में ताले लटक जाएंगें। अशोक कुमार सिंह ने यह भी कहा कि इस संबंध में उनका संगठन जल्द ही झारखंड के वित्त मंत्री से मिलेगा और डिमांड करेगा कि झारखंड के सभी जिलों में पंपों के बकाए का भुगतान अविलंब कराया जाए और आगे से सप्ताह में ही पेमेंट सुनिश्चित किया जाए. देखना दिलचस्प होगा कि पेट्रोल पंपों को क्रेडिट फैसिलिटी बंद होने के बाद अब आगे होता क्या है---?
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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