धनबाद में निगम चुनाव --"ब्लड प्रेशर" से शुरू होकर "ब्लड प्रेशर" तक, क्यों तनाव में हैं सांसद, विधायक!

    धनबाद में निगम चुनाव --"ब्लड प्रेशर" से शुरू होकर "ब्लड प्रेशर" तक, क्यों तनाव में हैं सांसद, विधायक!

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद नगर निगम चुनाव परिणाम को लेकर रांची से लेकर दिल्ली तक के लोगों की नजरे टिकी हुई है.  चुनाव प्रचार रोचक रहा.  प्रत्याशियों और उनके समर्थक भी आरोप -प्रत्यारोप में उलझे रहे.  फिलहाल "ब्लड प्रेशर" से शुरू हुआ चुनाव प्रचार फिर एक बार "ब्लड प्रेशर" तक पहुंच गया है.  27 फरवरी को वोटो की गिनती शुरू होगी।  उसके बाद धीरे-धीरे परिणाम मिलने लगेंगे।  फिलहाल मेयर पद के प्रत्याशी ही तनाव में नहीं है, बल्कि उनके समर्थक विधायक और सांसद भी तनाव में है.  विधायक और सांसद की प्रतिष्ठा दांव पर लग  गई है.  

    सभी दलों की लगी हुई है चुनाव परिणाम पर टकटकी 

    सत्ता दल हो अथवा विपक्ष, सबका एक ही हाल है.  झामुमो  को भी चिंता है, तो कांग्रेस भी कम चिंतित नहीं है.  भाजपा वाले भी परेशानी में है.  ऐसे में चुनाव प्रचार में कही गई तीखी बातें   किसके पक्ष में  गया है.  इसका पता अब कुछ ही घंटे में चल जाएगा।  चुनाव प्रचार बहुत तल्ख़ रहा, ब्लड प्रेशर की दवा से लेकर पागल तक की दवा की बात सामने आई.  सांसद ढुल्लू महतो  ने कहा कि धनबाद में वह माफिया को रोकेंगे।  उनका इशारा पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह की ओर था.  इसके जवाब में संजीव सिंह ने कहा कि अगर किसी का "ब्लड प्रेशर" बढ़ गया है, तो तुरंत डॉक्टर से इलाज कराना  चाहिए।  इसके बाद भी तल्खी  बनी रही. 

    धनबाद के चुनाव में बड़े -बड़े नेताओं की रही दिलचस्पी 
     
    यह  अलग बात है कि भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह धनबाद पहुंचे और नेता और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया।  इस चुनाव में भाजपा के तीन विधायक और एक सांसद संजीव अग्रवाल के पक्ष में थे, तो झामुमो  के एक और माले  के दो विधायक झामुमो के पक्ष में थे.  कहा जा सकता है कि सत्ताधारी विधायकों की प्रतिष्ठा भी दांव  पर है ,तो विपक्ष के विधायकों की भी अग्नि परीक्षा होगी।  फिलहाल तो वोटिंग के बाद नेताओं में चुपी  है, लेकिन चुनाव परिणाम को लेकर उम्मीदवारों के साथ-साथ उनके समर्थकों का भी "ब्लड प्रेशर" बढ़ा हुआ है.  कहा जा रहा है कि निगम चुनाव का परिणाम धनबाद की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है.  राजनीति की मोड को बदल सकता है. 
     
    कई "स्वयंभू" नेताओं की भी पोल पट्टी खुलने का आ गया है समय 

     कई "स्वयंभू" नेताओं की भी पोल पट्टी खुल सकती है.  दरअसल, इस चुनाव में कांग्रेस ने भी एक उम्मीदवार का समर्थन किया तो झामुमो   भी अपना समर्थित उम्मीदवार उतारा।  भाजपा ने भी उम्मीदवार उतारा, भाजपा के तीन बागी मैदान में रहे.  पूर्व विधायक संजीव सिंह को लेकर खूब चर्चा रही.  प्रदेश भाजपा ने झारखंड के 18 भाजपा नेताओं को नोटिस जारी किया।  लेकिन उस नोटिस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई.  मतलब साफ है कि यह डराने धमकाने की नोटिस थी.  लेकिन बागियों  ने उस नोटिस को दरकिनार कर दिया। 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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