COAL SCAM : पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं फैसला आज, दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

    COAL SCAM : पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं फैसला आज, दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के लिए आज का दिन काफी अहम होने वाला है. दरअसल आज दिल्ली हाईकोर्ट में मधु कोड़ा ने याचिका दायर करते हुए कोयला घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से दोषी ठहराये जाने वाले फैसले को निलंबित करने की मांग की है. आज इस मामले में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच में सुनवाई की जाएगी. आपकों बता दें कि 8 मई को हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने मधु कोड़ा की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इस मामले में पहले ही ऐसी याचिका को खारिज करने का आदेश दे चुकी है. साथ ही यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. जिसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए इस याचिका को सुनवाई योग्य होने के सवाल पर 13 अगस्त को सुनवाई करने का आदेश दिया था. फिलहाल आज इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है.

    सजा नहीं की गई निलंबित तो नहीं लड़ पाएंगे विधानसभा चुनाव- मधु कोड़ा

    मधु कोड़ा ने अपने याचिका में कहा कि वे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री है और वे झारखंड विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते है. उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा का चुनाव नवंबर 2024 में होना है. अगर सजा को निलंबित नहीं किया जाता है तो वे विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. आपकों बता दें कि 16 दिसंबर 2019 को पटियाला हाउस कोर्ट ने मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता, झारखंड  पूर्व मुख्य सचिव एके बसु और विजय जोशी को तीन- तीन साल की सजा सुनाई थी. मधु कोड़ा ने पटियाला हाउस से इसी आदेश को निलंबित करने की मांग की है.

    निर्दलिय विधायक से बने झारखंड के सीएम

    बता दें कि झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा ने साल 2000 में पहली बार जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की. मधु कोड़ा ने भाजपा के टिकट पर चुने गए थे. हालांकि उसी साल झारखंड को बिहार से अलग कर दिया गया और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी को राज्य की गद्दी सौपी गई. उस दौरान कोड़ा को रुरल डेवलेपमेंट में राज्य मंत्री का पद दे दिया गया. हालांकि मरांडी राज्य में ज्यादा लंबे समय तक पद पर नहीं रहे और 2003 में अर्जुन मुंडा ने नए सीएम के तौर पर शपथ ली. उस वक्त कोड़ा को पंचायती राज का मंत्री बनाया गया था. जिसके बाद 2005 में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा के चुनाव में मधु कोड़ा को टिकट देने से इनकार कर दिया. तब कोड़ा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए भी उन्होंने 2005 के विधानसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा की सरकार का समर्थन किया और जितने के बाद उन्हें खान एवं भूवैज्ञानिक मामलो का मंत्री बनाया गया. लेकिन सरकार बनने के एक साल के अंदर ही कोड़ा औऱ तीन अन्य निर्दलीय विधायकों ने अपने पांव शीच लिए और अर्जुन मुंडा की सरकार गिर गई और मधु कोड़ा को सभी का समर्थन मिला और उन्हें राज्य का अगला सीएम बनाया गया. उन्होंने 2008 में यूपीए के समर्थन में नई सरकार का गठन किया. लेकिन उसी साल जेएमएम ने अपना समर्थन वापस ले लिया और कोड़ा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. इस्तीफा देने के एक साल बाद यानी 2009 में सीबीआई और ईडी ने मधु कोड़ा को गिरफ्तार कर लिया. जांच एजेंसियों ने यह दावा किया की सीएम रहते हुए कोड़ा ने कोयला घोटाले में रिश्वत ली है.

     


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