धनबाद (DHANBAD): कोयला उद्योग में सबसे अधिक अभी चर्चा कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ )की ही है. विशेष बात है कि रिटायर्ड कर्मचारी भी इसकी चर्चा कर रहे हैं तो कार्यरत कर्मचारी भी चर्चा में शामिल हैं. अगर संस्थान की आर्थिक सेहत बिगड़ी तो प्रभावित कार्यरत कर्मचारी भी होंगे और रिटायर्ड कर्मचारी भी. संस्थान का कोष लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है. कार्यरत कर्मचारियों की संख्या घट रही है तो रिटायर्ड कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है. एक आंकड़े के मुताबिक फिलहाल कोल इंडिया में 2.10 लाख कर्मचारी कार्यरत है, जबकि रिटायर्ड कर्मचारियों की संख्या 5 लाख के करीब पहुंच गई है.
हाई लेवल कमेटी के सुझाव के बाद चर्चाएं तेज
सीएमपीएफओ की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए हाई लेवल कमेटी बनी थी. कमेटी ने कई सुझाव दिए हैं. हालांकि यह अभी सिर्फ सुझाव हैं. इसे अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्र की अनुमति जरूरी होगी. सूत्र बता रहे हैं कि एक यह भी सुझाव आया है कि पेंशन की गणना 60 महीने के वेतन के आधार पर किया जाए तथा ₹15000 पेंशन का सीलिंग तय किया जाये. अगर ऐसा हुआ तो कोयलाकर्मियों को मिलने वाली पेंशन में कमी हो जाएगी. यह भी बताया जाता है कि ईपीएफओ की तुलना में सीएमपीएफओ में अधिक पेंशन और सुविधाएं मिलती हैं. वर्तमान में कोयला उद्योग में मैनपावर की संख्या घट रही है. इस वजह से अंशदान भी कम आ रहा है. पैसा जितना आ रहा है, उससे अधिक की निकासी हो रही है.
मांग उठ रही है कि कोयला कंपनी एकमुश्त आर्थिक सहायता करें
मांग उठ रही है कि सीएमपीएफओ को कोयला कंपनी एकमुश्त आर्थिक सहायता करें, जबकि कोयला कंपनियों इसके लिए तैयार नहीं हैं. वर्तमान में सीएमपीएफओ में अंतिम 10 महीने के वेतन के आधार पर पेंशन तय की जाती है और इसमें वेतन को लेकर कोई सीलिंग नहीं है. जबकि ईपीएफओ के नियमों के अनुसार अंतिम 60 महीना के औसत वेतन और सीलिंग के उपयोग से राशि तय की जाती है. अगर ईपीएफओ की तर्ज पर सीएमपीएफओ में भी पेंशन की राशि तय होने का निर्णय हुआ, तो इसका सीधा नुकसान कोयला कर्मियों को पड़ सकता है और यही वजह है कि कार्यरत 2.10 लाख कर्मचारी और सेवानिवृत्ति लगभग 5 लाख कर्मचारी की चिंताएं बढ़ गई हैं. हालांकि नई व्यवस्था केंद्र सरकार की अनुमति के बाद ही बनेगी, लेकिन क्या निर्णय होगा, इसको लेकर उहापोह की स्थिति है.


