Coal India:चुनौतियों  के बीच  सरप्लस कर्मचारियों को देश-विदेश जाने का ऐसे मिलेगा मौका 

    Coal India:चुनौतियों  के बीच  सरप्लस कर्मचारियों को देश-विदेश जाने का ऐसे मिलेगा मौका 

    धनबाद(DHANBAD): कोल इंडिया को प्राइवेट प्लेयर्स से मिल रही चुनौतियों से निबटने के लिए खनन क्षेत्र का दायरा बढ़ाने में लगी हुई है. लगभग सवा 2 लाख कर्मचारियों को रोजगार देने वाली विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया अब अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी में है. सब कुछ अगर ठीक-ठाक रहा, तो कोल इंडिया लिथियम और कोबाल्ट का भी खनन करेगी. बता दें कि लिथियम और कोबाल्ट का खनन बहुत दुष्कर कार्य है. वैसे तो कोयला का खनन भी कम खतरनाक नहीं है. लेकिन कंपनी यह काम बखूबी से कर रही है. दरअसल, दिल्ली प्रगति मैदान में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में कोल इंडिया की ओर से लिथियम और कोबाल्ट खनन संबंधी योजना पर एक प्रदर्शनी लगाई गई है. 

    लिथियम और कोबाल्ट के ब्लॉक अधिग्रहित करने के प्रयास में 
     
    लिथियम और कोबाल्ट के ब्लॉक भारत के साथ-साथ विदेश में भी है. कंपनी इन्हें अधिग्रहित  करने का प्रयास कर रही है. यह अलग बात है कि कोल इंडिया में प्राइवेट प्लेयर्स के प्रवेश के बाद कोल इंडिया को व्यावसायिक क्षेत्र में बना रहना धीरे-धीरे चुनौती हो सकती है. इसलिए कोल इंडिया अपना दायरा बढ़ा रही है. सूत्रों के अनुसार आउटसोर्स कंपनियों का प्रचलन कोल इंडिया में बढ़ने से कर्मचारियों की संख्या घट रही है. तो बहुत जगह कर्मचारी सर प्लस भी हो गए है. सरप्लस कर्मचारियों को नया-नया ऑफर देकर दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए भी योजना बनी है. इस पर काम भी हो रहा है. यह अलग बात है कि अभी भी देश की ऊर्जा की डिमांड को पूरा करने की जिम्मेवारी कोल इंडिया पर ही है. इधर, देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया में अब विदेश के भी माइनिंग ऑपरेटर काम करेंगे. ग्लोबल माइनिंग ऑपरेटर की भूमिका बढ़ेगी.  

    कोल इंडिया में ग्लोबल माइनिंग ऑपरेटरों को बुलाया जा रहा 

    कोल इंडिया एवं उसकी अनुषंगी इकाइयों में ग्लोबल माइनिंग ऑपरेटर को कोयला खनन के लिए बुलाया जा रहा है. अब वैश्विक स्तर की कंपनियां भी कोल इंडिया में काम करेगी. कोयला मंत्रालय ने इस संबंध में कई दिशा निर्देश कोल इंडिया एवं अनुषंगी  कंपनियों को दिए है. दरअसल, कोयला मंत्रालय कोयला उत्पादन में वृद्धि करने को लेकर काफी चिंतित है. कोयला उत्पादन को बढ़ाने, इम्पोटेड कोल पर निर्भरता कम करने के लिए कोयला मंत्रालय काम  कर रहा है. यह भी महत्वपूर्ण है कि कोयला उत्पादन लागत को कम करने के लिए कोयला मंत्रालय यह सब कर रहा है. अभी कोल इंडिया में माइन डेवलपर्स एवं ऑपरेटर ही काम कर रहे थे. यानी देशी कंपनियां ही थी. लेकिन अब ग्लोबल माइनिंग ऑपरेटर की भूमिका भी बढ़ेगी. तो इधर, कोल इंडिया भी अपना क्षेत्र बढ़ा रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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