"कोचिंग फैक्ट्री" राजस्थान का कोटा क्यों आ गया है चर्चे में, अभिभावकों के नए ढंग को जानिए

    "कोचिंग फैक्ट्री" राजस्थान का कोटा क्यों आ गया है चर्चे में, अभिभावकों के नए ढंग को जानिए

    धनबाद(DHANBAD): राजस्थान का कोटा एजुकेशन हब था और है. बड़े-बड़े सपने लेकर बच्चे यहां पहुंचते हैं, कोचिंग करते हैं, चाहत होती है कि बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता मिले और वह पूरे परिवार का नाम रोशन करे. लेकिन वर्ष "2023 में जो एक आंकड़े सामने आए हैं, वह चौंकानेवाले भी हैं और दिल दहलाने वाले भी. वर्ष "2023 में अब तक 23 बच्चों ने आत्महत्या कर ली है. इन 23 में से 13 नाबालिक हैं , 12 बच्चों ने तो कोटा पहुंचने के 6 महीने के भीतर ही सुसाइड कर लिया है. आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश के आठ, बिहार के 8, राजस्थान के चार , महाराष्ट्र के दो, मध्य प्रदेश के एक छात्र ने आत्महत्या की है. 2015 के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या '2023 में सर्वाधिक है. अगर इन घटनाओं पर नजर डाला जाए तो पता चलता है कि जीवन समाप्त करने वाले 15 बच्चे गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार से थे. पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और प्रदर्शन के दबाव में जान देने वालों में अधिकतर छात्र पुरुष हैं  और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. जान देने वाले अधिकतर छात्र उत्तर भारत के छोटे शहरों, गांव से थे. 

    उत्तर प्रदेश और बिहार के छात्रों की संख्या सबसे अधिक

    इनमें से उत्तर प्रदेश और बिहार के छात्रों की संख्या सबसे अधिक है. कोटा दशकों से मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए कोचिंग फैक्ट्री का सेंटर पॉइंट रहा है. कोटा ने देश को कई होनहार दिए हैं, वहीं दूसरी तस्वीर भी उभर कर सामने आ रही है. प्रतिस्पर्धा और उम्मीद की दौड़ में खुद को कमजोर पाने  के बाद अपनी जान गंवा दे रहे है. आंकड़े के अनुसार सवा दो लाख छात्र नीट  और इंजिनीय रिंग  जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है.आंकड़े बताते हैं कि इस साल जीवन लीला समाप्त करने वाले 23 में से 17 छात्र नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. इस आंकड़े ने अभिभावकों को भी विचलित कर दिया है. इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कोचिंग संस्थानों के मुख्य केंद्र के रूप में प्रख्यात राजस्थान के कोटा शहर में दूसरे राज्यों से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों की आत्महत्या की घटना से चिंतित उनकी मां या दादा- दादी अब उनके साथ रहने के लिए कोटा पहुंच रहे है.

    अभिभावक बच्चों को अब अकेले छोड़ना नहीं चाहते 
      
    अभिभावक बच्चों को अकेले छोड़ना नहीं चाहते. यह एक ऐसी तस्वीर है, जो किसी को भी चौंका सकती है. सबके मन में इच्छा होती है की अच्छी पढ़ाई करें, बेहतर नौकरी पाएं, अभिभावक भी बच्चों के इस इच्छा को पूरी करने के लिए हर कुछ दाव पर लगा देते है. गरीब घर के लड़के भी कोटा पहुंचने हैं, उन्हें घर की आर्थिक हालात की जानकारी होती है. जब वह समझने लगते हैं कि अब वह प्रतियोगी परीक्षा में सफल नहीं होंगे, तो जीवन लीला ही समाप्त कर लेते है. यह अच्छी बात नहीं है. उन्हें समझना होगा कि जीवन अनमोल है. जानकारी के अनुसार बच्चे हॉस्टल की छत से कूदकर जान  नहीं दें, इसके लिए नेट लगाने की भी शुरुआत कोटा में की गई है. इस तरह के नेट  लगाए जा रहे हैं कि अगर किसी ने प्रयास भी किया तो उनकी जान नहीं जा सकती.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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