DHANBAD: नौ माह की अबोध के लिए सेंटर बना मां की गोद, जानिए पूरा मामला


धनबाद(DHANBAD): बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ पोस्टर, होर्डिंग्स या विज्ञापन में ही दिखते हैं. धरातल पर स्लोगन का कोई असर नहीं होता, कम से कम धनबाद में तो यही होता है. धनबाद के स्पेशलाइज एडॉप्शन एजेंसी के सूत्रों की मानें तो उनके पास जो लावारिस बच्चे आते हैं. उनमें लड़कियों की संख्या अधिक होती है. बता दें कि अभी हाल ही में धनबाद रेलवे स्टेशन के यार्ड में लगी ट्रेन की एक बोगी में 9 माह की बच्ची लावारिस पाई गई. बच्ची के आसपास न कोई सामान था ना कोई आदमी. धनबाद आरपीएफ को इसकी सूचना मिली.
स्वस्थ और सुरक्षित है बच्ची
अधिकारियों ने मानवता दिखलाई और बच्ची को बरामद किया. बच्ची की मेडिकल टेस्ट कराई गई और उसके बाद उसे सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया गया. प्रावधान के मुताबिक सीडब्ल्यूसी में बच्चे की मेडिकल जांच के बाद उसे स्पेशलाइज एडॉप्शन एजेंसी के सेंटर में भेज दिया. बच्ची अभी स्वस्थ और सुरक्षित है. बता दें कि धनबाद के तपोवन कॉलोनी में यह स्पेशलाइज्ड एजेंसी संचालित है. नीरज कुमार यहां के प्रोजेक्ट मैनेजर है. The Newspost की टीम तपोवन कॉलोनी जाकर प्रोजेक्ट मैनेजर से बात की. उस लावारिस बच्ची का हाल जाना और भविष्य में आगे क्या-क्या हो सकता है, इसकी भी जानकारी ली. उन्होंने विस्तार से बताया कि बच्चे उनके पास सीडब्ल्यूसी के जरिए ही आते हैं और फिर सीडब्ल्यूसी के आदेशानुसार जैसा कहां जाता है, वह सब करते है.
डीएनए टेस्ट
लावारिस बच्ची को जिस मां ने अपने गर्भ में पाला होगा, किन परिस्थितियों में उसे छोड़ दिया गया. इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है और ना ही एजेंसी या सीडब्ल्यूसी के पास इस बच्चे के कोई दावेदार आए है. बता दें कि बच्चे का दावेदारी करने वालों का डीएनए टेस्ट कराया जाता है और उसके बाद मिलान होने के बाद ही बच्चे की दावेदारी पुख्ता मानी जाती है. फिर कायदे कानून को फॉलो करते हुए बच्चे को हैंड ओवर कर दिया जाता है. लावारिस बच्ची अभी एजेंसी में ही रहेगी.
रिपोर्ट: शाम्भवी सिंह, धनबाद
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