मुख्यमंत्री जी ! सुनिए-झारखंड के कुल 62,000 सहायक शिक्षक क्या कह रहे है, क्या है उनकी मांगे-परेशानी !

    मुख्यमंत्री जी ! सुनिए-झारखंड के कुल 62,000 सहायक शिक्षक क्या कह रहे है, क्या है उनकी मांगे-परेशानी !

    धनबाद (DHANBAD) : 2024 में गठबंधन झारखंड में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आया है. झामुमो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आया है.  लेकिन झारखंड में कार्यरत 62 000 पारा  टीचर (अब सहायक शिक्षक) नई सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए है. स्थाई  करने की मांग कर रहे है. एक आंकड़े के मुताबिक झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों में अभी भी एक लाख से अधिक पद खाली है. वह कहते है कि 22 वर्षों से लगातार सेवा देने के बाद भी राज्य के 62000 सहायक अध्यापक आज सुरक्षित नहीं है. रिटायर्ड होने पर कोई लाभ नहीं दिया जाता. किसी की मृत्यु हो जाने पर भी अनुकंपा का लाभ नहीं मिलता. किसी प्रकार की मेडिकल सुविधा की व्यवस्था नहीं मिलती.  

    अब तो उम्र भी 50 वर्ष के करीब पहुंच गई है 

    अधिकतर पारा शिक्षकों की उम्र 50 साल या तो पहुंच गई है या पहुंचने वाली है. झारखंड के मिडिल से लेकर प्राथमिक विद्यालयों में पारा टीचर काम कर रहे है. कई नए प्राथमिक विद्यालय तो पारा शिक्षकों के भरोसे ही चल रहे है. उन्हें सेवा देते हुए लगभग 22 वर्ष गुजर गए, फिर भी उन्हें सामान्य शिक्षकों की तरह वेतन नहीं मिल रहा है. वेतन के नाम पर सरकार उन्हें मानदेय देती है. पारा शिक्षक भी सामान्य शिक्षक की तरह वेतनमान देने की लगातार मांग कर रहे है. इसके बाद भी सुविधा नहीं मिल रही है. झारखंड के पारा टीचर अब बिहार की तरह नियोजन की मांग कर रहे है. उनका कहना है कि झारखंड में पारा शिक्षकों की स्थिति अच्छी नहीं है.  उनकी मांग "नक्कारखाने  में तूती की आवाज" साबित हो रही है.  न सरकार ध्यान दे रही है और ना जनप्रतिनिधि रुचि दिखला रहे है. 

     समान काम के बदले समान वेतन का क्या हुआ 

    समान काम के बदले समान वेतन का सिद्धांत सिर्फ स्लोगन बनकर रह गया है. शिक्षकों का कहना है कि सरकार उनकी भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है. सरकार से उनकी मांग है कि समान काम के लिए समान वेतन सिद्धांत को लागू किया जाए. पारा शिक्षकों को जितना मानदेय मिलता है, उससे घर चलाना, परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बाधित हो रही है. बात इतनी ही नहीं है, जब सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत होती है तो अधिकारी शिक्षकों की बहाली पर ही सवाल उठा देते है. कहते हैं कि पारा शिक्षकों की बहाली में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है. दूसरे कई मापदंड भी नहीं अपनाये गए है. इसके जवाब में पारा  शिक्षकों का कहना है कि अगर रोस्टर का पालन नहीं किया गया है, तो इसमें पारा  शिक्षकों का क्या दोष है? क्या बिना किसी गलती के उन्हें 22 वर्षों से पेंडुलम की तरह झुला  कर रखा गया है. उनके मुताबिक पारा शिक्षकों को टेट पास होने के आधार पर मानदेय का भुगतान किया जाता है. 

    जानिए-कितना मिलता है मानदेय 

    1 से 5 तक के टेट पास शिक्षकों को 21,700 का पेमेंट होता है, वहीं कक्षा 6 से 8 तक के लिए टेट पास पर शिक्षकों को 23,400 का भुगतान मिलता है. पारा शिक्षक कहते हैं कि इसमें विसंगतियां है. इसे दूर करने की जरूरत है. उनकी मांग है कि  उनके लिए अनुकंपा नीति झारखंड सरकार भी लागू करे. यदि पारा शिक्षकों की मृत्यु हो जाती है तो आश्रित को तत्काल नौकरी मिले. बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी हर कैटेगरी के आधार पर पारा शिक्षकों को मानदेय मिले. बढ़ती महंगाई को देखते हुए मानदेय में 50 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की जाए. सेवानिवृत्ति या मृत्यु होने पर न्यूनतम 10 लाख रुपए तक की राशि का भुगतान किया जाए. पारा शिक्षकों को भी सरकारी शिक्षकों की तरह ग्रुप बीमा का लाभ दिया जाए. उनका कहना है कि ऐसी बात नहीं है कि अपनी बातों को उन लोगों ने सरकार तक नहीं पहुंचाई है. कई दौर की वार्ता भी हुई है, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला, पारा शिक्षक आज भी संघर्ष कर रहे है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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