धनबाद की बदलती राजनीति : ढुल्लू महतो -अशोक मंडल की जोड़ी क्या निरसा का बदलेगी सियासी समीकरण

    धनबाद की बदलती राजनीति : ढुल्लू महतो -अशोक मंडल की जोड़ी क्या निरसा का बदलेगी सियासी समीकरण

    धनबाद(DHANBAD): तो क्या अब बदलेगा निरसा विधानसभा क्षेत्र का सियासी समीकरण? क्या भाजपा को अब अपर्णा सेनगुप्ता पर भरोसा कम गया है ? क्या गणेश मिश्रा भी पीछे धकेल दिए गए हैं? भाजपा में एक बार फिर शामिल होने के लगभग चौखट पर खड़े जेएलकेएम नेता अशोक मंडल की सांसद ढुल्लू महतो से जुड़ना, क्या इन्हीं सब बातों का संकेत है? अशोक मंडल अब एटक  में शामिल हो गए हैं.  अशोक मंडल मैथन थर्मल विस्थापित एवं स्थानीय समिति के अध्यक्ष भी हैं.  अपने समर्थकों के साथ वह एटक  में शामिल हुए हैं.  सांसद ढुल्लू महतो ने उनका स्वागत किया है. अशोक मंडल भाजपा में भी रह चुके हैं.  

    महीन चाल का परिणाम दिखने में लग सकता है समय 

    यह अलग बात है कि यह  कोई साधारण परिवर्तन नहीं है.  इसके पीछे भी गहरी राजनीतिक  सोच है.  विधायक अरूप चटर्जी अभी हाल ही में सांसद  के खिलाफ काफी मुखर  हुए हैं.  एयरपोर्ट के लिए जब सांसद  की अगुवाई में धनबाद में धरना -प्रदर्शन हुआ था, तो अरूप चटर्जी ने तथ्यों के आधार पर कई बातों का खुलासा किया था और कहा था कि राज्य सरकार यानी झारखंड सरकार ने जब एयरपोर्ट से संबंधित फाइल का मूवमेंट तेज किया है ,तो झूठी वाहवाही  लेने के लिए यह सब किया जा रहा है.  मतलब साफ है कि अरूप  चटर्जी सांसद  के खिलाफ हमलावर हैं.  तो सांसद ने भी एक महीन चाल  चलकर अरूप  चटर्जी को उनके ही घर में घेरने  की कोशिश की है.  आगे इसका परिणाम क्या होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि सांसद ढुल्लू महतो  मजदूर संगठन की आड़ में निरसा  क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने की राजनीतिक कोशिश कर रहे हैं.  

    अशोक मंडल भी निरसा से विधायक बनने की लगातार कोशिश करते रहे

    यह  अलग बात है कि अशोक मंडल भी निरसा से विधायक बनने की लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन अभी तक विधायक नहीं बन पाए है. 2014 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के गणेश मिश्रा ने अरूप  चटर्जी का बेजोड़ पीछा किया और मात्र कुछ ही वोटो से हार गए. 2014 में अरूप चटर्जी को 51,581 वोट मिले थे, जबकि गणेश मिश्रा को 50, 546 वोट प्राप्त हुए थे. अशोक मंडल को 43,32 9 वोट मिले थे, जबकि अपर्णा सेनगुप्ता को 23,633 वोट मिले थे. अशोक मंडल झारखंड मुक्ति मोर्चा तो अपर्णा सेनगुप्ता फॉरवर्ड ब्लॉक से चुनाव लड़ रहे थे . 

    लोकसभा चुनाव में निरसा से भाजपा को मिलती  रही है बढ़त 

    यह अलग बात है कि 2019  के लोकसभा चुनाव में भी निरसा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को बढ़त मिली थी.  तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को बढ़त  मिली .  यह  इलाका सेमी अर्बन इलाका  है. ग्रामीण परिवेश के लोग भी हैं, तो शहरी भी  यहां रहते है. बोलचाल और कल्चर बंगाल का यहां देखा जाता है. 2019 के निरसा  विधानसभा चुनाव परिणाम की  बात की जाए तो भाजपा की अपर्णा सेनगुप्ता विजई हुई थी.  उन्हें 89,082 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी मासस  के अरूप चटर्जी को 63,624 वोट मिले थे.  जबकि झामुमो  के अशोक मंडल को 47,168 वोट मिले थे.  फिर अगर 2024 की बात की जाए तो माले  के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अरूप चटर्जी को 1,04,855 वोट मिले थे जबकि भाजपा की अपर्णा सेन  गुप्ता को 1,03,047 वोट प्राप्त हुए, जबकि जेएलकेएम के नेता अशोक मंडल को 16,316 वोट प्राप्त हुए थे. 

    निरसा के इतिहास की बात की जाए तो कम से कम 2000 के बाद तो गुरुदास चटर्जी, अरूप चटर्जी,अपर्णा सेन  गुप्ता के बीच यह सीट बंटती रही. यह  अलग बात है किअशोक मंडल भी निरसा से विधायक बनने की लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन अभी तक विधायक नहीं बन पाए है. 

     



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