चाईबासा: A.C.C सीमेंट कारखाना के मूल रैयतों की पीड़ा, जमीन के साथ छीनी गयी आजीविका, सीएम हेमंत से न्याय की गुहार

    चाईबासा: A.C.C  सीमेंट कारखाना के मूल रैयतों की पीड़ा,  जमीन के साथ छीनी गयी आजीविका, सीएम हेमंत से न्याय की गुहार

    चाईबासा(CHAIBASA): झारखण्ड में इन दिनों रोज एक ना एक नया जमीन घोटाला सामने आ  रहा है. ऐसे ही कई मामले पश्चिमी सिंहभूम में देखने को मिल रहे हैं. संघ संगठन के नाम पर जिले में बड़ी मात्रा में जमीन की बंदरबांट हुई है. दावा किया जा है कि यदि इसकी जांच की गयी तो यहां से एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आ सकता है.

    झींकपानी प्रखंड में A.C.C  सीमेंट कारखाना

    ऐसे ही एक मामले को सामने लाते हुए झींकपानी प्रखंड के जिला परिषद सदस्य जॉन मिरल मुण्डा के द्वारा A.C.C  सीमेंट कंपनी का मामला उठाया गया है. सीएम हेमंत सोरेन को लिखे गये पत्र में मुण्डा ने दावा किया है कि झींकपानी के जोड़ापोखर एवं कुदाहातु गाँव पर आदिवासियों की रैयती जमीन पर 1944 में A.C.C  सीमेंट कंपनी की नींव रखी गयी थी. शुरु में इस कंपनी के द्वारा करीबन 21 सौ स्थाई मजदूरों को रोजगार दिया गया था, इसके साथ ही C.S.R. फण्ड से ग्रामीण विकास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल सुविधा एवं खेलकुद को प्रात्साहित करने के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था. इसके कारण अगल बगल के गांवों में काफी चहलकदमी रहती थी, लोगों को आजीविका मिल रही थी.

    विरान पड़ी है ए०सी०सी० कॉलोनी

    लेकिन वर्ष 2000 के बाद कंपनी के द्वारा द्वारा बलात मजदूरों को वीआरएस देकर बैठाना शुरु कर दिया गया और ठेकेदारी प्रथा की शुरुआत कर दी गयी, अब इस कंपनी में कोई भी स्थायी मजदूर नहीं है, जिसके कारण बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन हो रहा है. ए०सी०सी० कॉलोनी विरान पड़ी है.

    अवैध लीज का इस्तेमाल कर रैयतों की जमीन पर कब्जा

    दावा किया जाता है कि कंपनी के द्वारा अवैध लीज पेपर का निर्माण कर बड़ी मात्रा में रैयतों की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है. जमीन के साथ ही रैयतों को अपनी आजीविका भी खोनी पड़ी है. रैयत आज रोजी रोटी की तलाश में पलायन को मजबूर है. रैयतों की मांग सभी अवैध लीज को समाप्त कर उसके मूल मालिकों को जमीन वापस लौटाने की है.

    अब अडाणी समूह के द्वारा किया जा रहा है कंपनी का संचालन

    सनद रहे कि वर्तमान में इस कंपनी का संचालन अडाणी समूह के हाथों किया जा रहा है. जिस जमीन का लीज ए०सी०सी० सीमेंट कंपनी के नाम किया गया था, अब उसी जमीन पर अडाणी समूह का कब्जा है, इसके कारण उसके मूल रैयतों में बेचैनी है, अडाणी समूह के द्वारा ठेके पर मजदूर लिये जा रहे हैं, यही कारण है कि रैयतों के द्वारा लीज को समाप्त कर नये सिरे से इसके मूल रैयतों के साथ एक बार फिर से लीज तैयार करवाने की मांग की जा रही है.  

    हर तीस वर्ष पर किया जाता है इसका लीज नवीकरण

    रैयतों का दावा है कि  ए०सी०सी० सीमेन्ट कंपनी हर 30 साल का लीज नवीकरण रैयतों के द्वारा किया जाता है, लेकिन इसके बदले में उन्हे कोई सुविधा नहीं दी जा रही है. जबकि उनकी ही जमीन पर कंपनी अरबों रुपये की कमाई कर रही है. सनद रहे कि वर्ष 2013 में विधान सभा की एक जांच कमेटी में भी इस बात का खुलासा हुआ था कि कंपनी के द्वारा उसके मूल रैयतों को नौकरी पर नहीं रखा जा रहा है. यही कारण है कि जोड़ापोखर, कुदाहातु और बासाहातु के जमीन मालिक रोजगार और मुआवजे की मांग के लिए 4 मई  को अनुमण्डल कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करना का निर्णय लिया है.

    रिपोर्ट. संतोष वर्मा