विश्वास मत हासिल करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का राज्य सरकार पर कड़ा हमला, क्या कह रहे हैं पढ़िये

    विश्वास मत हासिल करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का राज्य सरकार पर कड़ा हमला, क्या कह रहे हैं पढ़िये

    रांची (RANCHI): हेमंत सोरेन सरकार के झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विश्वास मत हासिल करने के मामले में भाजपा ने सख्त रुख अपनाया. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सांसद दीपक प्रकाश ने हेमंत सरकर पर कड़ा हमला किया है. उन्होंने कहा कि इस सत्र को लेकर जिस प्रकार वातावरण बनाया गया मानो हेमंत सरकार सत्र बुलाकर कोई बड़ा निर्णय लेने जा रही हो. 

    खोदा पहाड़ और निकली चुहिया" की कहावत  हुई चरितार्थ

    उन्होंने सरकार को कोसते हुए कहा कि  जनता को उम्मीद थी कि सुखाड़ पर किसानों को बड़ी राहत देने, खतियान आधारित स्थानीय नीति पर, महिलाओं पर बढ़ते अपराध और ओबीसी, एसटी और एससी आरक्षण में बढ़ोतरी का प्रस्ताव  को लेकर सदन में गंभीर चर्चा होगी. कुछ पर मुहर भी लगेगी परंतु आज का यह विशेष सत्र "खोदा पहाड़ और निकली चुहिया" की कहावत चरितार्थ करता नजर आया. 

    खुद के लिए खुद के द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर खुद के विधायकों से लिया विश्वासमत

    मुख्यमंत्री ने विधानसभा में खुद के लिए खुद के द्वारा लाए गए खुद के विधायकों से विश्वासमत लिया. झारखंड सरकार ने विधायकों का विश्वास तो हासिल किया लेकिन झारखंड की जनता का विश्वास खो दिया. दीपक प्रकाश ने कहा कि जब सरकार चल ही रही है तो फिर इस प्रकार की नौटंकी और हंगामा किसलिए किया गया.

    विधायकों को बंधक बनाकर इतना तमाशा क्यों

    राज्य सरकार द्वारा इस मामले में पहले पिकनिक के लिए खूंटी फिर छतीसगढ़ के रायपुर में विधायकों को बंधक बनाकर इतना तमाशा करने की क्या जरूरत थी. झारखंड सरकार डरी-सहमी और पूरी तरह खोखली है. बिना पूछे और बिना किसी से मांगे ही खुद ही विश्वास मत हासिल करने का दिखावा कर रही है.

    एक मामला ठंडा नहीं होता दूसरा सुलग जा रहा है

    प्रकाश ने कहा कि किसी भी सरकार का कमिटमेंट राज्य की जनता से होता है. हेमंत सरकार तो राज्य की जनता का ही विश्वास खोकर अपने ही विधायकों का विश्वास जीतने में लगी हुई है. पूरा राज्य अपराध, लव जिहाद से सुलग रहा है. पूरे राज्य में अराजकता का माहौल है. एक मामला ठंडा भी नहीं होता कि दूसरा सामने आ जाता है.  राज्य सरकार में थोड़ी भी शर्म और जनता के प्रति तकलीफ होती तो यह सरकार अंकिता, दुमका में दुष्कर्म कर पेड़ से टांगी गई आदिवासी बेटी, लोहरदगा की लव जिहाद की शिकार आदिवासी बेटी सहित तमाम ऐसे पीड़ित परिवारों का विश्वास जीतने का प्रयास करती. अपराधियों को वोटबैंक के चश्मे से नहीं देखते हुए उन्हें कठोरतम सजा दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करती. परंतु ऐसा करना छोड़ मुख्यमंत्री उल्टा पीड़ित परिवार के जख्मों को कुरेदते हुए कहते हैं कि ऐसी छोटी-बड़ी घटनाएं होती रहती है.



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