भाजपा महिला आरक्षण बिल पर कर रही गुमराह, सदन में चेहरा हुआ बेनकाब तो बौखलाहट में पीएम: कांग्रेस  

    भाजपा महिला आरक्षण बिल पर कर रही गुमराह, सदन में चेहरा हुआ बेनकाब तो बौखलाहट में पीएम: कांग्रेस

    रांची (RANCHI): देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी पारा हाई है. सदन में बील पास ना होने पर भाजपा विपक्ष को महिला विरोधी बताने में लगी है तो वहीं कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. साथ ही इसे भाजपा की सियासत का खेल बताया है. इसी कड़ी में रांची स्तिथि कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश,विधायक दल नेता प्रदीप यादव,मंत्री दीपिका पांडे सिंह समेत कई नेताओं ने प्रेस वार्ता किया.         

    भाजपा की मंशा सही नहीं

    संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि केन्द्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी. सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष इस बिल को पारित कर दे ताकि इसकी आड़ में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर सके. सरकार द्वारा जो साजिश रची गयी, उसका उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना था.

    किस वजह से लाया महिला आरक्षण बिल

    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में लोकसभा से सर्वसम्मति से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, तब इस विधेयक की क्या जरूरत थी. 2023 में विधेयक में स्पष्ट था कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन और परिसीमन के आधार पर महिला आरक्षण होना था. एकाएक 16 अप्रैल को महिला आरक्षण विधेयक को लाना केन्द्र सरकार की गहरी राजनैतिक चाल परिसीमन का हिस्सा था. क्योंकि केन्द्र सरकार यह जानती है कि जब जनगणना होगा, तब देश को पता चला जायेगा कि जातियों की संख्या सामने आयेगी, एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक का दबाव बढ़ेगा. तब उन्हें भी आरक्षण देना पड़ेगा. इसलिए केन्द्र सरकार ने उन महिलाओं एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक के अधिकारों की कटौती एवं आरक्षण की कटौती  के लिए इस विधेयक को आनन-फानन में लाया है, जिसे इण्डिया गठबंधन ने बेनकाब कर दिया.

    भाजपा का भांडा फुट गया

    ग्रामीण  विकास मंत्री दीपिका पाण्डेंय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महिला विधेयक की चाशनी में केंद्र सरकार अपनी घटिया राजनीति को थोपने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है. महिला विधेयक की आड़ में परिसीमन का खेल खेलनी वाली बीजेपी सरकार का भांडा फूट चुका है, जो अंक गणित केंद्र की सरकार ने अगले चुनाव के लिए परिसीमन के बहाने सेट किया था, उसको गठबंधन ने डिकोड कर दिया है. यही वजह है कि पिछले 12 साल से केंद्र में शासन कर रही बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार पहली बार लोकसभा में विधेयक गिर जाने से तिलमिलाई हुई है. वो बेचौन है क्योंकि पहली बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी है. देश की आबो हवा बदल रही है.

    महिला आरक्षण के नाम पर पीएम अपनी रोटी सेक रहे

     राजनैतिक मौसम अब करवट लेने लगा है. देश के प्रधानमंत्री महिला आरक्षण और सम्मान के नाम पर अपने भविष्य को लेकर सत्ता में काबिज रहने काएक षडयंत्र रचा था, जो पूरी रह धराशाही हो चुका है. भाजपा की मंशा कहीं से भी महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं है. अगर ऐसा होता तो साल 2023 में लोकसभा से सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक के आधार पर साल 2024 का चुनाव होना चाहिए था, तब महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल पाता, परन्तु ऐसा नहीं हुआ. दरअसल बीजेपी ने हमेशा से महिलाओं को ठगने, मुद्दों से भटकाने और उनकी हकमारी करने का काम किया है.

     



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