बिहार : विधायक दल का नेता चुनने में नीतीश कुमार ने क्यों नहीं की देरी ,किस समीकरण से श्रवण कुमार बने नेता!

    बिहार : विधायक दल का नेता चुनने में नीतीश कुमार ने क्यों नहीं की देरी ,किस समीकरण से श्रवण कुमार बने नेता!

    धनबाद(DHANBAD): विधायक श्रवण कुमार को जदयू  के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने विधायक दल का नेता चुना है.  श्रवण कुमार नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा से आते हैं.  नालंदा विधानसभा से वह 31 साल से लगातार विधायक हैं.  उनकी गिनती नीतीश कुमार के सबसे विश्वास पात्र नेताओं में होती है.  दरअसल, सोमवार को पटना में जदयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुनने के लिए अधिकृत किया गया था. नीतीश कुमार इस काम ने विलम्ब करना नहीं चाहते थे.  

    केवल एक दिन बाद ही कर दी गई घोषणा 

    मात्र एक दिन बाद ही नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार के नाम की घोषणा कर दी.  सूत्र बताते हैं कि श्रवण कुमार सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री की रेस में आगे -आगे चल रहे थे.  मगर किन्हीं कारणों  से उनका नाम हट  गया और जदयू खाते से विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया.  राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा है कि पार्टी में जातीय समीकरण को ठीक-ठाक करने के लिए श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाया गया है.  

    श्रवण कुमार 31 साल से लगातार विधायक है और 

    श्रवण कुमार कुर्मी जाति से आते हैं.  नीतीश कुमार भी इसी जाति से हैं और कुर्मी -कुशवाहा आधारित राजनीति करते आए हैं.  नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जदयू से एक भूमिहार और एक यादव को डिप्टी सीएम बनाया है.  वही कुर्मी -कुशवाहा समीकरण साधने के लिए श्रवण कुमार को जदयू विधायक दल का नेता बनाया है.  श्रवण कुमार भी जेपी आंदोलन के प्रोडक्ट है.  अभी हाल ही में श्रवण कुमार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.   लोग तो यह भी बताते हैं कि निशांत कुमार को राजनीति में लाने में श्रवण कुमार की बड़ी भूमिका रही. 



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