Coal India के स्थापना दिवस पर बड़ा सवाल : कोयला मजदूरों की आर्थिक स्वतंत्रता पर कौन कर रहा कुठाराघात !

    Dhanbad, Jharkhand
    Coal India के स्थापना दिवस पर बड़ा सवाल : कोयला मजदूरों की आर्थिक स्वतंत्रता पर कौन कर रहा कुठाराघात !

    धनबाद (DHANBAD) : कोल इंडिया के स्थापना दिवस पर मजदूर संगठनों ने सवाल भी किए है. कहा है कि कंपनी देश की ऊर्जा की जरुरत बन गई है. कंपनी को वित्तीय वर्ष में मुनाफा भी हुआ है. लेकिन राष्ट्रीयकरण के उद्देश्यों को पूरा करने में देश  नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी विफल रही है. राष्ट्रीय कोयलारी मजदूर यूनियन (इंटक ) के महामंत्री एके झा ने कोयला मंत्री को पत्र लिखकर कोयला मजदूरों की बिगड़ती स्थिति और लगातार उनकी उपेक्षा पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा है कोल इंडिया कि जिस समय स्थापना हुई थी, उस समय लगभग 7 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे. आज उनकी संख्या 2 लाख के लगभग रह गई है. उन्होंने यह भी  कहा है कि देश के 8 राज्यों में कोयले का उत्खनन हो रहा है.  झारखंड इसमें प्रमुख है.  

    श्रीमती इंदिरा गांधी ने कोयला मजदूरों को दिलाई थी आर्थिक स्वतंत्रता 

    उन्होंने कोयला मंत्री को याद दिलाया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 17 अक्टूबर 1971 को देश की तमाम कोकिंग कोयला खदानों को और 23 जनवरी 1973 को नॉन कोकिंग कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण कर कोयला मजदूरों को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाई थी.  लेकिन फिलहाल कोल इंडिया की लगभग व्यवस्थाएं आउटसोर्स कर दी गई है.  इस वजह से मजदूरों का शोषण बढ़ गया है.  कहा गया है कि आउटसोर्स कंपनियां खान सुरक्षा के नियम का पालन नहीं करती, केवल निजी लाभ के लिए जैसे -तैसे कोयले का उत्पादन कर रही है.  यह  राष्ट्रीयकरण के मूल भावना के खिलाफ है.  उन्होंने कहा है कि कोल्  इंडिया के राष्ट्रीयकरण के बाद उत्पादन में तो कई गुना वृद्धि हुई, मुनाफा भी बढ़ा , लेकिन मजदूरों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है.  सरकार हर साल उत्पादन लक्ष्य बढ़ा  रही है, लेकिन मजदूरों की संख्या और संशाधन  घटते जा रहे है.  यह कोयला उद्योग के लिए भी चिंता का विषय है.

    कोल इंडिया अपना 51 वां स्थापना दिवस मना रही है
     
    बता दें कि कोल इंडिया अपना 51 वां  स्थापना दिवस मना रही है. कोलिरियों में जगह-जगह कार्यक्रम हो रहे है. आउटसोर्स सिस्टम लागू होने की वजह से कोल इंडिया में जो बचे रेगुलर मजदूर हैं, उन्हें भी किस्तों में सरप्लस घोषित किया जा रहा है.  कोल इंडिया की कई सहायक कंपनियां का  शेयर बाजार में लिस्ट करने की भी योजना है. देखना है आउटसोर्स के इस जमाने में आगे कोल इंडिया कोयला उत्खनन में क्या कुछ कदम उठाती है? वैसे भी कोल इंडिया में एक समय मजदूर संगठनों का दबदबा था, लेकिन समय के साथ मजदूर संगठन कमजोर पड़ते गए. मजदूर संगठनों के सदस्यों की संख्या घटती गई.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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