रांची (RANCHI): सीबीआई की विशेष अदालत ने 29 साल पुराने अलकतरा घोटाला मामले में 4 अभियुक्तों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया है. वहीं तीन अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया. जबकि 1997 से चल रहे ट्रायल के दौरान दो आरोपियों की मौत हो चुकी है. सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया है.
मामले में बनाए गए थे 9 आरोपी
अलकतरा घोटाले में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने केस नंबर 12/97 दर्ज किया था. इस केस में कुल 9 आरोपी बनाए गए थे. मो. इसहाक, एसके दास, एसएन औरंजेब, एससी प्रसाद, भरत प्रसाद गुप्ता, ट्रांसपोर्टर विनय कुमार सिन्हा, राजकुमार राय, आरएस मंडल और आशीष मैयटे ट्रायल फेस कर रहे थे. इनमें से दो आरोपी, मो. इसहाक और भरत प्रसाद गुप्ता, की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई थी
लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने आरोपियों को कराया दोषी करार
मामले में सीबीआई की लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की और कई गवाहों की गवाही कराने के बाद चार आरोपियों को सजा सुनवाई लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने बताया कि अलकतरा की सप्लाई के लिए तीन अलग-अलग सप्लाई ऑर्डर लिए गए थे,और सभी में घोटाला किया गया.
मामले को लेकर दिए गए थे 3 अलग अलग ऑर्डर
दरअसल एनएच डिविजन बरही में रोड कंस्ट्रक्शन के लिए पश्चिम बंगाल के हल्दिया से एनएच बरही तक बरौनी के रास्ते अलकतरा पहुंचाना था. लेकिन हल्दिया से सीधे बरही ले जाया जाता था और ट्रांसपोर्टेशन क्लेम किया जाता रहा. तीनों ऑर्डर में शॉर्टेज भी पाया गया था पहले ऑर्डर में 491 एमटी की जगह 431 मीट्रिक टन, दूसरे में 195 एमटी की जगह 146 एमटी और तीसरे में 541 एमटी के बदले 505 एमटी सप्लाई किए गए थे. ट्रांसपोर्टर के द्वारा बरौनी में बिना रिपोर्टिंग किए फर्जी भाड़ा बिल जमा किया गया था. मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने केस दर्ज किया. रोड डिपार्टमेंट के अमरेंद्र नारायण ने बरही थाने में मामला दर्ज कराया था. मामले में बरही थाने में 1997 में एफआईआर दर्ज हुआ था.


