धनबाद(DHANBAD): लीजिए!! अब आ गया नया सत्र का समय, अभिभावकों की जेब काटने की पूरी तैयारी हो चुकी है. दुकानदारों और स्कूल मैनेजमेंट की "सेटिंग" के बीच अभिभावक पीस जाएंगें। जिनके घरों में दो या उससे अधिक बच्चे स्कूल गोइंग हैं , उनके लिए कठिन समय का दौर शुरू हो गया है. आश्चर्य इस बात की होती है कि प्रत्येक साल इसको लेकर विवाद होता है. सरकार की "गाइडलाइन" आती है ,लेकिन निजी स्कूलों और किताब दुकानदारों की सांठगांठ इतनी मजबूत है कि उसे तोड़ पाना किसी के लिए संभव नहीं होता।
अभिभावकों की सबकुछ बर्दाश्त करने की क्या होती मज़बूरी --?
नतीजा होता है कि अभिभावक माथा पीटते हैं, गुस्सा जाहिर करते हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के नाम पर सब कुछ बर्दाश्त कर लेते हैं. एक तरह से यह निजी स्कूल संचालकों और किताब दुकानदारों के बीच अघोषित समझौता है, जो दुकानदार जितना चालक और होशियार होता है, उसकी कमाई उतनी ही अधिक होती है. यह अलग बात है कि प्रत्येक जिले में अभिभावक संघ जरूर है, लेकिन उनकी भी कुछ चलती नहीं है. हो हल्ला जरूर करते हैं, शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं होता। अभिभावकों को वह कोई राहत नहीं दिला पाते।
दो या तीन बच्चे स्कूल गोइंग वाला परिवार क्यों होगा परेशान --?
जिनके घरों में दो या तीन बच्चे स्कूल गोइंग हैं , उनका पूरा बजट बिगड़ने की तैयारी में हैं. उनकी पॉकेट पर अचानक बोझ इतना पड़ जाएगा कि किसी न किसी क्षेत्र में उन्हें कटौती करनी पड़ेगी। पब्लिक स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 26-27 की शुरुआत होने जा रही है. अभिभावकों को नए सत्र के लिए किताब, कॉपी, स्टेशनरी व ड्रेस की खरीदारी शुरू करनी पड़ गई हैं. अधिकतर पब्लिक स्कूलों ने निजी प्रकाशको की किताबों का पूरा सेट ही बदल दिया है. अभिभावकों का सीधा आरोप है कि स्कूलों की ओर से बुक लिस्ट बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन अधिकतर पब्लिक स्कूलों की किताबें विशेष दुकानों में ही मिल रही है. बताया जा रहा है कि हर एक किताब में एक दो चैप्टर का बदलाव किया गया है, इस वजह से नई किताबें खरीदना अभिभावकों की मज़बूरी है.
पिछले साल की तुलना में इस साल का आंकड़ा चौंकाने वाला क्यों ---?
बात इतनी ही नहीं है, कहा जा रहा है कि पिछले सत्र की तुलना में 15 से 20% तक की मूल्य में वृद्धि हुई है. किताब के साथ एक कवर रोल (स्कूल नाम के प्रिंट वाला) की कीमत 80 से 90 रुपए तक है. एलकेजी की किताब का पूरा सेट लगभग ₹2000 में आ रहा है. कक्षा 3 से लेकर नवमी तक की किताबों के लिए 5 से 7000 का भुगतान करना पड़ रहा है. अभिभावक माथा पीट रहे हैं और कह रहे हैं की विशेष दुकानों से उन्हें कुछ ऐसी सामग्रियां खरीदने के लिए बिवस किया जाता है, जिसका कभी उपयोग होता ही नहीं है. अभिभावकों को री एडमिशन फीस यानी एनुअल डेवलपमेंट फीस समेत अन्य शुल्क देने होंगे। एक अनुमान के अनुसार जिनके घरों में दो बच्चे पढ़ रहे हैं उन्हें अतिरिक्त 35 से ₹40000 खर्चने होंगे। ड्रेस की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल की तुलना में ड्रेस की कीमतों में 200 से 300 रुपए अधिक भुगतान की बात अभिभावक बता रहे हैं.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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