BCCL VS Power Plant : बीसीसीएल-पावर प्लांटों  में क्यों छिड़ा है शीतयुद्ध, मामला क्यों आ गया चेतावनी तक !

    BCCL VS Power Plant : बीसीसीएल-पावर प्लांटों  में क्यों छिड़ा है शीतयुद्ध, मामला क्यों आ गया चेतावनी तक !

    धनबाद (DHANBAD) : देश ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल पर स्टॉक का दबाव बढ़ गया है. प्रोडक्शन के अनुरूप डिस्पैच नहीं हो रहा है.  कोयल का स्टॉक बढ़ता जा रहा है.  पावर प्लांट कोयला उठाने में कंजूसी कर रहे है.   सूत्रों के अनुसार कोयला उठाव  पर कई पावर प्लांट अचानक कमी कर  रहे है.  सूचना के मुताबिक बीसीसीएल में ऐसी स्थिति में एनटीपीसी, डीवीसी सहित कई कंपनियों को चेतावनी के लहजे में पत्र लिखा है. बीसीसीएल ने कहा है कि संयंत्र द्वारा कम रैक  लोडिंग प्रोग्राम देने और कोयला उठाव  सीमित करने से उत्पादन और डिस्पैच की योजना प्रभावित हो रही है.

    क्या कहती है कोयला उत्पादक कंपनी बीसीसीएल ?
     
    बीसीसीएल के मुताबिक वित्तीय वर्ष 25-26 के लिए उत्पादन एवं डिस्पैच योजना पावर प्लांट की कोयल की जरूरत के अनुसार तैयार की गई है.  इसके तहत भूमि अधिग्रहण, उत्पादन और परिवहन कार्यों के लिए दीर्घकालीन एवं अल्पकालिक अनुबंध किये  जा चुके है.  कंपनी के पास करीब 5 मिलियन टन  कोयला स्टॉक में है और कंपनी प्रतिदिन डेढ़ लाख टन  से अधिक उत्पादन करने की क्षमता रखती है.  ऐसे में उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही कटौती के बाद अनुबंधों को स्थगित करना संभव नहीं है.  

    कोयला उठाव नार्मल करने की हो रही अपील 

    अपील की गई है कि सभी प्लांट कोयल का उठाव  सामान्य करे.  बीसीसीएल के महाप्रबंधक  विक्रय के  हस्ताक्षर से जारी पत्र में कहा गया है कि अगस्त- सितंबर तक पावर प्लांट पर्याप्त रैक  लोडिंग प्रोग्राम भेज रहे थे.  लेकिन अक्टूबर के बाद अचानक कम कर दिया गया है.  कई प्लांटों  ने गुणवत्ता का हवाला देकर कोयला उठाव  कम कर दिया है, जबकि वर्ष भर के दौरान बीसीसीएल को कोयले की गुणवत्ता पर सराहना पत्र मिलते रहे है. उल्लेखनीय है कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और पावर प्लांटों के बीच  कोयले की गुणवत्ता और आपूर्ति को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है. 

    कोयले को लेकर पावर कंपनियों के अक्सर क्या रहता है आरोप ?
     
    पावर कंपनियां अक्सर आरोप लगाती हैं कि उन्हें ईंधन आपूर्ति समझौते (FSA) में तय ग्रेड के अनुसार कोयला नहीं मिलता , जबकि BCCL का दावा कराती  है कि वह करार से अधिक कोयला भेजा जाता है.   पावर प्लांटों का मुख्य आरोप रहता  है कि उन्हें मिलने वाला कोयला निर्धारित गुणवत्ता (ग्रेड) से कमजोर होता है, जिससे बिजली उत्पादन में उतनी दक्षता नहीं मिलती, जितनी मिलनी चाहिए, और इससे उनके उपकरणों को भी नुकसान होता है. सूत्र बताते है कि घटिया कोयले की आपूर्ति के कारण, पावर प्लांट अक्सर BCCL का बकाया भुगतान रोक लेते हैं या काटने का प्रयास करते हैं, जिससे वित्तीय विवाद भी  पैदा होता है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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