रांची (RANCHI): झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर राज्य की राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है. आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मरांडी ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का पुरजोर समर्थन किया और विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने की ऐतिहासिक पहल की थी, लेकिन विपक्ष के नकारात्मक रवैये और असहयोग के कारण यह महत्वपूर्ण बिल सदन में पारित नहीं हो सका. मरांडी ने इसे महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करार देते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े किए.
बाबूलाल मरांडी ने आंकड़ों के जरिए झारखंड को होने वाले फायदे का खाका भी पेश किया. उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह अधिनियम पारित होता है, तो झारखंड में लोकसभा सीटों की संख्या 14 से बढ़कर 21 हो जाएगी, जिसमें 7 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इसी तरह, विधानसभा सीटों की संख्या भी 81 से बढ़कर 121 तक पहुँच जाएगी, जिससे 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व का अवसर मिलेगा. इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल की अनुमति से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बिल पारित करने की मांग की है.
मरांडी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब 'गेंद राज्य सरकार के पाले में है'. उन्होंने मुख्यमंत्री को महिला सशक्तिकरण का पैरोकार बनने की चुनौती देते हुए कहा कि झारखंड को इस दिशा में इतिहास रचना चाहिए और केंद्र पर पुनः इस बिल को पारित करने का दबाव बनाना चाहिए. मरांडी का मानना है कि इस कदम से राज्य की महिलाओं को लंबे समय से प्रतीक्षित न्याय मिल सकेगा.

