असम की राजनीति कैसे देगी झारखंड को टीस, किसको कितना होगा फ़ायदा,विपक्षी गठबंधन पर क्या होगा असर

    असम में कांग्रेस 7 सीटों का ऑफर दिया था लेकिन झामुमो को यह मंजूर नहीं हुआ और अब झारखंड मुक्ति मोर्चा असम के 19 सीटों पर चुनाव लड़ेगा

    असम की राजनीति कैसे देगी झारखंड को टीस, किसको कितना होगा फ़ायदा,विपक्षी गठबंधन पर क्या होगा असर

    TNP DESK- असम में कांग्रेस 7 सीटों का ऑफर दिया था लेकिन झामुमो को यह मंजूर नहीं हुआ और अब झारखंड मुक्ति मोर्चा असम के 19 सीटों पर चुनाव लड़ेगा।  सोमवार को यानी 23 मार्च को नामांकन की अंतिम तिथि है.  कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिश बे नतीजा  रही.  कई दौर की वार्ता चली, लेकिन नतीजा नहीं निकला।  इधर, बिहार चुनाव में चोट खाया झामुमो  असम में आक्रामक रूप अख्तियार कर चुका है. 

    झारखंड में तो साथ मिलकर सरकार चलाएंगे लेकिन

    बता दें कि विपक्षी एकता पर एक बड़ा डेवलपमेंट हुआ है .कांग्रेस और झामुमो झारखंड में तो फिलहाल साथ मिलकर सरकार चलाएंगे, लेकिन असम चुनाव में कांग्रेस और झामुमो आमने-सामने होंगे. आज नामांकन की अंतिम तिथि है. और झामुमो ने साफ कर दिया है कि वह 19 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगा. झारखंड में तो झामुमो और कांग्रेस साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं. लेकिन अब असम में एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में होंगे. रविवार को तस्वीर साफ हो गई कि असम में झामुमो और कांग्रेस में गठबंधन अब नहीं होगा. झामुमो अकेले चुनाव लड़ने का फैसला ले लिया है. हालांकि यह फैसला कई दौर की बैठक के बाद लिया गया है. 

    असम कांग्रेस के प्रभारी और असम कांग्रेस अध्यक्ष रांची भी आये थे 

    आपको याद होगा कि असम कांग्रेस के प्रभारी और असम कांग्रेस अध्यक्ष रांची आए थे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी. बातचीत हुई थी .फिर दिल्ली में भी कांग्रेस के बड़े नेताओं से बात हुई. लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद झामुमो ने 19 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है. इस फैसले का दूरगामी असर विपक्षी गठबंधन पर पड़ सकता है. असम में कुल 126 सीट हैं .19 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. झामुमो यह मानकर चल रहा है कि झारखंड में आदिवासी राजनीति के अनुभव को वह असम में अप्लाई कर लाभ ले सकता है. 

    दिल्ली में भी नहीं बनी बात तो हुआ अकेले लड़ने का निर्णय 

    सूत्र बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद दिल्ली जाकर कांग्रेस नेतृत्व से मिले, लेकिन सम्मानजनक सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन सकी. जिसके बाद झामुमो स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया है .सूत्र बता रहे हैं कि कांग्रेस झामुमो को 6 या 7 सीट देने पर राजी थी. लेकिन झामुमो इसके लिए तैयार नहीं हुआ और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला ले लिया है. झामुमो के पक्ष में एक बात और हुई है कि निर्वाचन आयोग ने उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह तीर धनुष अलॉट कर दिया है .असम में फिलहाल भाजपा की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्ष की भूमिका में है. झामुमो के इस कदम को झारखंड के बाहर राजनीतिक पैठ बनाने की एक मजबूत कोशिश बताई जा रही है.

    हिमंता  विश्व सरमा के खिलाफ अब बोलेंगे हेमंत सोरेन 

    उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा चुनाव में असम के मुख्यमंत्री ने एनडीए की ओर से कमान संभाल रखी थी.  कई लोगों को पार्टी से  इधर से उधर करने में उनकी बड़ी भूमिका थी.  हेमंत सोरेन के खिलाफ लगातार कुछ ना कुछ बोल रहे थे.  लेकिन अब समय ने पलटा खाया है और हेमंत सोरेन अब हिमंता  विश्व सरमा  के घर में जाकर उनके खिलाफ ही बोलेंगे। 


    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Related News

    Our latest news