जगी झरिया तो मेयर -विधायक पर कैसे बढ़ा दबाव , कह रही - सबको दिया अब मुझे चाहिए अपना हक़ -हुकूक!

    जगी झरिया तो मेयर -विधायक पर कैसे बढ़ा दबाव , कह रही - सबको दिया अब मुझे चाहिए अपना हक़ -हुकूक!

    धनबाद(DHANBAD) : धनबाद की झरिया राजनीति को लेकर भी चर्चा में रहते रही है.  झारखंड का पहला नगर विकास मंत्री देने वाली झरिया आज भी फटेहाल है.  यह शहर अपनी आंचल में अकूत कोयल का भंडार संभाले हुए है.  बीसीसीएल की समृद्धि झरिया के कोयले पर निर्भर करती है.  झरिया ने अब तक दो को मंत्री बनाया।  एक झारखंड सरकार में मंत्री बने तो बिहार सरकार में भी झरिया के पूर्व विधायक आबो  देवी मंत्री रहीं।  लेकिन झरिया प्रदूषण की समस्या तो झेल  ही रही है, बूंद -बूंद पानी के लिए भी तरसती रही है.  जैसी कि  जानकारी है, इस साल दामोदर नदी का पानी इंटेक वेल  से दूर चला गया है, इस परिस्थिति में झरिया का जल संकट और भी बढ़ेगा।

    झरिया कैसे मांग रही अपना अधिकार -
     
    इधर ,झरिया को उसका हक दे दो,इस विचार के साथ  अग्रवाल धर्मशाला परिसर में झरिया के भविष्य के लिए जन जागरुकता बैठक आयोजित की गई. जिसकी अध्यक्षता शिवबालक पासवान ने की.  मंच संचालन अनिल कुमार जैन ने किया।  धन्यवाद ज्ञापन महेश शर्मा ने किया। उपस्थित जन समूह ने कहा- झरिया में बहुत सारी परेशानियां हैं.  लेकिन सबसे अच्छी बात है, यहां के लोगों में जिंदादिली, हार ना मानने का जुनून ,महेंद्र सिंह मीनू ने कहा: झरिया हमारी जन्म जननी भूमि है.  इसके सर्वांगीण विकास के लिए जो भी करना चाहिए, हम सब एक हैं. अखलाख अहमद ने कहा झरिया कोलफील्ड बचाओ समिति का पुनरुद्धार जरूरी है.  इस समिति को पूर्ण रूप से मजबूत करना होगा। अनूप साव ने कहा झरिया का भविष्य अधर में है. 

    आउटसोर्सिंग कंपनियां भी रहीं निशाने पर 
     
    झरिया की दुर्गति का कारण गलत तरीके से चल रही आउटसोर्सिंग कंपनी हैं.  इसका साथ देने वाले जन प्रतिनिधि हैं. समरेंद्र पासवान ने कहा- हम सब झरिया वासी एकजुट हैं.  जो भी कार्य नीति नियम के विरुद्ध किए जा रहे हैं, उसका हमलोग विरोध करेंगे। भीम निषाद ने कहा पांडेबेरा,फतेहपुर, लिलोरी पथरा से जल्द ही पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.  इसको रोकने के लिए हमसब को मिलकर सामूहिक प्रयास करना चाहिए। राजेंद्र रजवार ने कहा किसी कार्य को संपन्न करने के लिए  एक ठोस रणनीति और प्लानिंग करनी पड़ेंगी। मनोज सिंह ने कहा हरियाली बढ़ाकर ही हम बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ लड़ सकते हैं. 
     
    बैठक में  निर्णय लिए गए कि अब चुप नहीं रहेंगे -

    झरिया  को उसका हक मिलना चाहिए, जब  सरकार हर तरह के टैक्स लेती है तो  जमीन का माल गुज़ारी रसीद क्यों नहीं कटता हैं? झरिया में पानी की व्यवस्था अनियमित है, पानी के बिल में भी बहुत गड़बड़ी है.  नगर निगम से निवेदन करना है कि पानी के बिल में जो भी विसंगति है, उन्हें  दूर करने के लिए खुला कैंप लगाया जाए, विभिन्न क्षेत्रों में. सभी ने झरिया की बिगड़ी बिजली व्यवस्था पर रोष व्यक्त किया।  झरिया में दिन में 8 से 10 घंटे बिजली नहीं मिलती है.  विधायक, महापौर  को इस पर पहल करना चाहिए।  झरिया में ही इतनी बिजली की कमी क्यों है? गरमी आने वाली है, इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए. 
     सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, झरिया कोलफील्ड बचाओ समिति को पूर्ण जीवित किया जाए, इसका जल्द से जल्द चुनाव हो. . झरिया के क्षेत्र में जो भी विकास कार्य हो, उसमे झरिया की जनता की जन भागीदारी हो, 

    झरिया के लोगो की रजामंदी से ही कार्य हों 

    रजामंदी हो.  जनता की सहमति से ही सारे कार्य किये जाए.  जल्द ही पदयात्रा निकाल कर इस समिति का विस्तार किया जाएगा। जल्द ही फिर से बैठक आयोजित कर अन्य समस्या और समाधान की जानकारी ली जाएगी।  उसके बाद महापौर, विधायक  को सादर आमंत्रित कर, खुली चर्चा की जाएगी। उपस्थित लोग अशोक अग्रवाल, बृजमोहन शर्मा, मनीष यादव, भीम निषाद, सुमित कुमार प्रसाद, कुंदन कुमार मोदक, गौतम बैनर्जी, संजय तिवारी, अखलाख अहमद, मनोज सिंह, मनदीप साव, योगेंद्र प्रसाद, रवि केशरी, राजेंद्र रजवार, महेश शर्मा, दिनेश पांडे, सूरज कुमार साह, सोमनाथ चटर्जी, अनूप साव, अजय कुमार सिंह, भगवान साहू, सूरज कुमार महतो, सतनारायण भोजगढ़िया, जय प्रकाश गुप्ता, राजू साव, संगीता दे, राजेंद्र रजवार, ग्रेसी रजवार, समरेन्द्र पासवान, मुकेश राणा, अमित कुमार बरनवाल, शिवबालक पासवान मौजूद थे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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