धनबाद(DHANBAD): जिलों से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. नवोदय और एकलव्य विद्यालय में दाखिले के लिए जरूरी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे आदिवासी बच्चों और उनके परिजनों ने सिविल सर्जन कार्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. आरोप है कि सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर हर छात्र से 1500 रुपये की मांग की जा रही है.
बताया जा रहा है कि ग्रामीण इलाकों से आए कई बच्चे पिछले पांच दिनों से लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनका मेडिकल परीक्षण भी नहीं हो पाया है. वहीं, 20 अप्रैल तक सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य है, जिससे बच्चों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है.
परिजनों के साथ पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को गंभीर बताया. जिला परिषद सदस्य पिंकी मरांडी ने कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चों से पैसे मांगना सही नहीं है. वहीं जोबा मरांडी ने चेतावनी दी कि अगर समय पर सर्टिफिकेट नहीं बना तो बच्चों का नामांकन रुक सकता है, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा. बीजेपी नेता राजीव ओझा ने भी प्रशासन पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर लापरवाही बताया और कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए.
हालांकि, सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही मेडिकल जांच पूरी कर सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाएंगे. लेकिन इस में सवाल उठता है कि अगर समय रहते बच्चों को सर्टिफिकेट मिल पाएगा तो उनके भविष्य का क्या होगा.
रिपोर्ट- नीरज कुमारT
Thenewspost - Jharkhand
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