हाय रे, हमर सोना झारखंड: इस जिले में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से होता है बालू का अवैध उत्खनन, पुलिस और प्रशासन क्यों है मौन 

    हाय रे, हमर सोना झारखंड: इस जिले में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से होता है बालू का अवैध उत्खनन, पुलिस और प्रशासन क्यों है मौन 

    बोकारो (BOKARO):  बोकारो जिले के गोमिया थानाक्षेत्र के बोकारो नदी से इन दिनों बालू माफियाओं के द्वारा अवैध रूप से बालू का उत्खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है. दिन के उजाले में तो कम, लेकिन रात के अंधेरे में बालू माफिया बुलंद हौसले के साथ बोकारो नदी में अवैध रूप से बालू का उत्खनन करते हैं. थानाक्षेत्र स्थित बोकारो नदी के साड़म, होसिर पूल, ढेंढे, तुलबुल के कारी टोंगरी आदि जगहों से बालू माफियाओं के द्वारा अवैध रूप से बालू का उत्खनन ऐसे किया जाता हैं, जैसे लगता कि वे मानो नदियों का चीरहरण कर रहे हैं.

    ग्रामीणों को भी होती है परेशानी-

    ग्रामीणों के अनुसार रात के अंधेरे में दर्जनों ट्रैक्टर गाड़ियों से बालू की अवैध ढुलाई की जाती है. इन्हें रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं है. ट्रैक्टरों की चलने की आवाज से नींद भी भंग हो जाता है. वहीं कहा कि ट्रैक्टरों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि सड़क किनारे चलते हुए व्यक्ति कभी भी उसकी चपेट में आ सकता है. कहा कि बीते दिनों ट्रैक्टर की तेज रफ्तार की चपेट में एक मवेशी आ गया था. इस बात को लेकर काफी हंगामा भी हुआ था.

    तंग आकर ग्रामीण रात के समय एकजुट होकर पिंडरा सड़क पर अवैध बालू लदे कई ट्रैक्टरों को रोक दिया. फिर काफी हो-हंगामा के बाद ग्रामीणों ने सभी रोके गए ट्रैक्टरों को छोड़ दिया.

    क्या यही है हमर सोना झारखंड-

    ग्रामीण कहतें हैं कि झारखंड को सोना झारखंड कहा जाता है, तो क्या इसी दिन के लिए हमारा झारखंड राज्य अलग हुआ था. क्या यही है हमर सोना झारखंड. जहां बेखौफ माफियाओं और भृष्टाचारियों का राज चल रहा है, और इन्हें रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं है और अगर ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में झारखंड में कुछ नहीं बचेगा.

    बोकारो, गोमिया से संजय कुमार की रिपोर्ट,


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