एयर एम्बुलेंस क्रैश मामला बना रहेगा रहस्य, नहीं मिला ब्लॉक बॉक्स, जांच जारी


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): राज्य में बीते दिनों हुए एयर एम्बुलेंस क्रैश मामले ने सबको झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में इस हादसे के बाद कई सवाल लोगों के मन में हैं जिनका अब जवाब अब दुधने की तैयारी है.
बताते चलें कि हादसा झारखंड के चतरा जिले में हुई थी, जहां एयर एम्बुलेंस दुर्घटना अब भी जांचकर्ताओं के लिए पहेली बनी हुई है. मामला मंगलवार 24 फरवरी का है जहां रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का बीचक्राफ्ट C90 विमान, जिसका पंजीकरण नंबर VT-AJV था, रांची से दिल्ली के लिए चिकित्सा निकासी उड़ान पर था, तभी यह सिमरिया ब्लॉक के कसरिया पंचायत के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में विमान में सवार सात लोगों की मौत हो गई.
नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार, जिन विमानों का अधिकतम टेक-ऑफ वजन 5,700 किलोग्राम से कम होता है, उनमें कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) अनिवार्य नहीं होते. इसी कारण इस विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था, जिससे दुर्घटना के वास्तविक कारण का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीम ने बुधवार 25 फरवरी को दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया. टीम ने मलबे से सभी महत्वपूर्ण सबूत एकत्र किए और आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा. उप-मंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) शुभम खंडेलवाल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि स्थानीय लोगों ने दुर्घटना के समय विमान का संतुलन बिगड़ते देखा. उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों का कहना है कि विमान संतुलन खो चुका था और कुछ ही सेकंड में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सभी शव बरामद कर पोस्टमार्टम कर दिया गया है.”
जांच के दौरान, AAIB टीम ने दुर्घटना से संबंधित दस्तावेज़ और सबूत एकत्रित किए. अधिकारी अभी भी दुर्घटनास्थल पर रहकर मलबे और अन्य सबूतों की छानबीन कर रहे हैं. भारतीय विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारी भी जांच में सहयोग कर रहे हैं.
भारतीय समयानुसार 19:11 बजे विमान ने रांची से उड़ान भरी थी. हालांकि, लगभग 100 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में वाराणसी से विमान का रडार और संचार संपर्क अचानक टूट गया. हादसे की यह स्थिति अभी भी विशेषज्ञों के लिए कई सवाल छोड़ गई है.
टीएमसी ने झारखंड सरकार से दुर्घटना की पूरी तरह पारदर्शी जांच की मांग की है. अधिकारियों का कहना है कि विमान की तकनीकी जांच, मलबे की समीक्षा और गवाहों के बयान से ही वास्तविक कारण का पता लगाया जा सकेगा. ब्लैक बॉक्स न होने के कारण जांच में समय लग सकता है, लेकिन अधिकारियों का प्रयास है कि सभी तथ्यों को उजागर किया जाए और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके.
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