सचिवालय घेराव के बाद भाजपाइयों ने राज्यपाल को सुनाया अपना दर्द, कहा लाठीचार्ज कर हेमंत ने दिखलायी तानाशाही

    सचिवालय घेराव के बाद भाजपाइयों ने राज्यपाल को सुनाया अपना दर्द, कहा लाठीचार्ज कर हेमंत ने दिखलायी तानाशाही

    रांची(RANCHI)- भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर सचिवालय घेराव के दौरान प्रर्दशनकारियों के साथ मारपीट किये जाने का आरोप लगाया है. प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास, सांसद दीपक प्रकाश ने कहा है कि प्रर्दशन पूरी तरह शांति पूर्ण था, बावजूद इसके प्रशासन के द्वारा प्रर्दशनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया. लोकतंत्र में सरकार की कमजोरियों को उजागर करना विपक्ष का राजनीतिक धर्म है, प्रर्दशकारियों के द्वारा भी इसी राजनीतिक धर्म का निर्वाह किया जा रहा था, लेकिन सरकार की सह पर प्रशासन के द्वारा आन्दोलन को कुचलने की रणनीति बनायी गयी और बेवजह प्रर्दशनकारियों पर लाठियां भांजी गयी. जिसमें हमारे दर्जनों कार्यकर्ता घायल हुए. जिनका इलाज पारस अस्पताल में करवाया गया.

    लाठीचार्ज की न्यायिक जांच की मांग

    लाठीचार्ज की न्यायिक जांच की मांग करते हुए दावा किया गया कि यह प्रर्दशन कहीं से भी उग्र नहीं था, प्रर्दशनकारियों के द्वारा कहीं भी किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की गयी थी.

    प्रशिक्षु आईएएस सहित एक पत्रकार को लगी थी चोट

    यहां बता दें कि प्रशासन का आरोप है कि प्रर्दशनकारियों के द्वारा पुलिस बल पर पत्थरबाजी की गयी, पानी के बोतल फेंके गये. जिसमें एक प्रशिक्षु आईएएस सहित एक पत्रकार को गंभीर चोट आयी. जिसके बाद पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा और इसमें कोई भी प्रर्दशनकारी गंभीर रुप से घायल नहीं हुआ.

    करीबन 20 हजार प्रर्दशनकारी पहुंचे थे रांची

    ध्यान रहे कि 11 अप्रैल को हेमंत हटाओ झारखंड बचाओ के नारे के साथ करीबन बीस हजार प्रर्दशनकारी सचिवालय का घेराव करने पहुंचे थें. हालांकि भाजपा का दावा तीन लाख प्रर्दशनकारियों को पहुंचने का था, झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्ज ने तंज कसते हुए कहा था कि चार हजार की भीड़ जुटाने के लिए भी भाजपा को गोड्डा से स्पेशल ट्रेन चलाना पड़ा रहा है, इससे ही झारखंड में भाजपा की राजनीतिक जमीन का आकलन किया  जा सकता है, इससे ज्यादा भीड़ तो शालिमार बाजार में होती है, अच्छा होता कि भाजपा अपना प्रर्दशन शालिमार बाजार में ही कर लेती, कम से उसके सामने स्पेशल ट्रेन चलाने की नौबत तो नहीं आती और वह इस राजनीतिक फजीहत से भी बच जाती, बावजूद इसके भाजपा करीबन 20 हजार प्रर्दशनकारियों को राजधानी रांची की सड़कों पर उतारने में सफल हो गयी थी.


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