जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले का जादूगोड़ा क्षेत्र तेजी से साइबर अपराध के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है. कभी खनन और यूसील परियोजना के लिए पहचान रखने वाला यह इलाका अब साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं को लेकर चर्चा में है. जामताड़ा की तर्ज पर यहां के कई गांवों के युवक आसान कमाई के लालच में साइबर अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं. हाल ही में दिल्ली पुलिस ने जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में छापेमारी कर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में ठगी करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया था. इससे पहले भी कई आरोपी साइबर ठगी के मामलों में जादूगोड़ा और आसपास के क्षेत्रों से गिरफ्तार किए जा चुके हैं. जादूगोड़ा के कोकदा, इचड़ा, कुलडिहा, बुर्काडीह, राखामाइंस, राखाकॉपर, तिलामुड़ा, आसानबनी, वीरग्राम समेत कई गांवों से साइबर ठगी के नेटवर्क संचालित होने की बात सामने आई है. मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए ठग देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बना रहे हैं. सिर्फ जादूगोड़ा ही नहीं, बल्कि उससे सटे घाटशिला, पोटका, कोवाली, चाकुलिया क्षेत्रों में भी साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि जादूगोड़ा स्थित यूसील के कर्मचारी भी ठगों के निशाने पर हैं और कई मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी का शिकार हो चुके हैं. यहां साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह क्षेत्र झारखंड के दूसरे जामताड़ा के रूप में पहचान बना सकता है.
ऐसे करते थे ठगी
इनमें कई आरोपी ऐसे हैं जो देशभर के लोगों को टेलीग्राम व व्हाट्सएप पर गूगल रिव्यू रेटिंग या गेम टास्क कंप्लीशन का झांसा देकर ठगी करते थे. ठगी के पैसे अलग-अलग खातों, यूपीआई आईडी और वॉलेट में ट्रांसफर कराए जाते थे. 10 प्रतिशत कमीशन पर आरोपी पैसे ट्रांसफर करवाते थे. बाकी रकम गिरोह के मास्टरमाइंड को भेजते थे. गिरफ्तार आरोपी ठगी के पैसों से महंगे मोबाइल, बाइक खरीदते थे. ठगी के पैसों से ही बदमाश कई जगहों पर घूमने गए. इसके अलावा शॉर्टकट माध्यम से पैसा कमाने और कम समय में अमीर बनने की चाहत में यहां के युवा ठगी का रास्ता अपना रहे है.
कई यूसील कर्मी बने शिकार
जादूगोड़ा और उसे आसपास के इलाकों में रहने वाले कई यूसील कर्मी और रिटायर्ड कर्मी साइबर ठगों का शिकार बन चुके है. पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद भी यहां ठगी नहीं रुक रही है. जनवरी 2005 में यूसिल के वैज्ञानिक आरएल पटनायक के खाते से 1.27 करोड़ रुपए उड़ाए गए. इसके अलावा जून 2025 में नवीन प्रसाद से 20 हजार, सितंबर 2025 में खगेश्वर मलिक से 75 हजार, डी लता से 75 हजार की ठगी की थी. फरवरी 2026 में यूसिल कर्मी से अर्जुन शर्मा से 3.20 लाख, 19 अप्रैल 2026 में रिटायर्ड यूसिल कर्मी गुरजीत सरदार से 1.20 लाख की ठगी की. सबसे बड़ी ठगी साइबर ठगों ने फरवरी 2026 में यूसील के रिटायर्ड कर्मी बीमल माइति से की. उन्हें करीब डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 1.21 करोड़ रुपए ठगे.
दिल्ली पुलिस तक यहां मार चुकी है रेड
18 जनवरी 2024 को चाकुलिया पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था. नवीन चंद्र महतो, राम चंद्र महतो, राहुल महतो, अजय दलाई, सुजय दलाई और जय सेनगुप्ता को पकड़ा रहा था. 3 अगस्त 2025 को जादूगोड़ा पुलिस ने राखामाइंस रेलवे स्टेशन से 3 साइबर अपराधी कोकदा गांव निवासी केशव चंद्र भकत, कपिलदेव भकत, गिरधारी भकत को गिरफ्तार किया था. जांच में पता चला था कि इनके खिलाफ देश भर में 29 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज की गई थी. 4 अगस्त 2025 को कोवाली पुलिस ने एक नाबालिग समेत 6 साइबर ठगों को पकड़ा था. गिरफ्तार युवकों में मानिक भकत, देव भकत, कितेश भकत, एक नाबालिग, मंथन भकत उर्फ रिंकू और चिरंजीत भकत उर्फ किरण शामिल थे. यह गिरोह करीब एक साल से देशभर के लोगों को ठग रहा था. 15 मार्च 2026 को सीआईडी ने घाटशिला में छापेमारी कर रोहित कुमार जैन को गिरफ्तार किया था. रोहित ईडी का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक रिटायर्ड डॉक्टर 38.62 लाख की ठगी की थी. 25 मार्च 2026 को दिल्ली पुलिस ने जादूगोड़ा के इचड़ा निवासी राज भकत को गिरफ्तार किया था. उसने दिल्ली के एक व्यक्ति से 7 लाख रुपए की ठगी की थी.

