सरायकेला (SARAIKELA): सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में राज्य के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) को लेकर कभी बड़े दावे किए गए थे. लेकिन ये दावे खोखले साबित हो रहे है. कहा गया था कि यहां इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों का हब विकसित होगा, नए निवेश आएंगे और स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा. लेकिन हकीकत यह है कि निर्माण पूरा होने के चार साल बाद भी यह महत्वाकांक्षी परियोजना वीरान पड़ी है. करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस क्लस्टर में तीन आधुनिक बहुमंजिला भवन बनाए गए थे. इनमें एक प्रशासनिक भवन है, जहां 30 से अधिक कार्यालयों के लिए जगह बनाई गई. लेकिन इतने बड़े परिसर में अब तक केवल एक कंपनी ने ही अपना दफ्तर शुरू किया है. बाकी कार्यालय खाली पड़े हैं. दो अन्य भवन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण और सॉफ्टवेयर आधारित कंपनियों के लिए बनाए गए थे, मगर वहां भी अब तक कोई गतिविधि शुरू नहीं हो सकी है. इसमें 2100 करोड़ का इन्वेस्टमेंट आने का अनुमान था. वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस भवन का उद्घाटन किया था.
भवन जर्जर, उपकरण हो रहे चोरी
उद्योग लगाने के बजाय अब ये भवन उपेक्षा का शिकार होते जा रहे हैं. कांच से बने इन आधुनिक भवनों की कई खिड़कियां टूट चुकी हैं. चोर रात के अंधेरे में परिसर में घुसकर उपकरण और अन्य सामान चुरा रहे है. सुरक्षा के लिए 10 से अधिक गार्ड तैनात किए गए हैं. बावजूद इसके चोरी की घटनाएं नहीं रुक रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना से रोजगार और औद्योगिक विकास की उम्मीद थी, वह अब सरकारी उदासीनता का प्रतीक बन गई है. अब तो भवनों में जगह-जगह दरारें भी दिखाई देने लगी हैं. ईएमसी क्षेत्र में कुल 52 औद्योगिक प्लॉट विकसित किए गए थे. इनमें से पहले छह चरणों में 42 से अधिक प्लॉट विभिन्न उद्यमियों को आवंटित किए गए, लेकिन जमीन आवंटन के बाद भी अधिकांश निवेश धरातल पर नहीं उतर पाया. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद यह परियोजना उद्योग और रोजगार देने के बजाय खाली इमारतों का ढांचा बनकर क्यों रह गई?
रोजगार की उम्मीद, पर परियोजना ठप
सरकार की महत्वाकांक्षी ईएमसी योजना के तहत आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी थी. इस परियोजना का उद्देश्य आदित्यपुर में औद्योगिक विस्तार को नई दिशा देना था. योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए आधारभूत संरचना विकसित की गई और उद्योग लगाने के लिए जमीन का आवंटन भी किया गया. ईएमसी में एलईडी बल्ब, एलईडी टीवी, मोबाइल के पार्ट्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण की योजना थी. इसके जरिए राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद जताई गई थी. अधिकारियों का दावा था कि परियोजना शुरू होने के बाद आदित्यपुर देश के उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में पहचान बनाएगा, लेकिन अब तक अधिकांश इकाइयों का संचालन शुरू नहीं हो सका है.
इसलिए नहीं आ रहे उद्योग
आदित्यपुर के ईएमसी क्षेत्र में उद्योग नहीं आने के पीछे कई व्यावहारिक कारण सामने आ रहे हैं. इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की असेंबलिंग से जुड़ी बड़ी कंपनियां झारखंड में मौजूद नहीं हैं, जिससे सप्लाई चेन विकसित नहीं हो सकी है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ा इकोसिस्टम नहीं बनता, तो बड़े निवेशक वहां उद्योग लगाने से बचते हैं. यही वजह है कि इस स्तर के उद्योगपति आदित्यपुर में निवेश करने को इच्छुक नहीं दिख रहे हैं. वहीं, छोटे और मध्यम स्तर की इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयों के लिए प्रशिक्षित तकनीकी श्रमिकों की भी कमी है. ऐसे उद्योगों को संचालन के लिए विशेष कौशल वाले वर्कर्स चाहिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर उस तरह का स्किल्ड मैनपावर उपलब्ध नहीं है. कंपनियों को बाहर से श्रमिक लाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है. यही कारण है कि आधारभूत संरचना तैयार होने के बावजूद कंपनियां यहां नहीं आ रही हैं और ईएमसी परियोजना अपेक्षित उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रही है.
रेट अधिक होने से संभवतः नहीं आ यही कंपनियां
जियाडा के क्षत्रिय उप प्रबंधक दिनेश रंजन ने बताया कि ईएमसी क्षेत्र में उद्योग नहीं आने का एक बड़ा कारण यहां निर्धारित दर माना जा रहा है। रेट अधिक होने के कारण संभवतः कंपनियां निवेश करने से पीछे हट रही हैं. इसी वजह से अब तक अपेक्षित संख्या में कंपनियां यहां नहीं आई हैं. सिर्फ 2 कंपनियां शुरू हुई है. दर कम करने के मुद्दे को लेकर आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी, ताकि अधिक निवेशकों को आकर्षित किया जा सके.

