लकड़ी के चूल्हे पर जलती सेवा की लौ, देवघर में 5-10 रुपये में मिल रहा भरपेट भोजन

    देवघर (DEOGHAR) : सेवा भाव की अनोखी मिसाल,गैस मिले या न मिले मगर गरीब,मरीज औऱ इनके परिजनों को भोजन मिलती रहेगी. देवघर में दो स्थानों पर लकड़ी पर भोजन बनाकर कर 5 और 10 रुपये में कराया जा रहा है भरपेट भोजन.

    लकड़ी के चूल्हे पर जलती सेवा की लौ, देवघर में 5-10 रुपये में मिल रहा भरपेट भोजन

    देवघर (DEOGHAR) : सेवा भाव की अनोखी मिसाल,गैस मिले या न मिले मगर गरीब,मरीज औऱ इनके परिजनों को भोजन मिलती रहेगी. देवघर में दो स्थानों पर लकड़ी पर भोजन बनाकर कर 5 और 10 रुपये में कराया जा रहा है भरपेट भोजन.

    सेवा भाव की एक अनोखी मिसाल

    इनदिनों विश्व पटल पर मिडल ईस्ट के देशों के बीच हो रही युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की समस्या से कई देश जूझ रहा है. जिसका असर भारत मे भी देखा जा सकता है. खासकर एलपीजी सिलेंडर की मारामारी से हर कोई परेशान है. गैस की किल्लत झारखंड के देवघर में भी देखा जा सकता है. आलम यह है कि कमर्शियल गैस की कमी के कारण कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान को काफी परेशानी हो रही है. कई समाज सेवी गरीब मजदूरों के लिए उचित मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराने वाले भी अपनी दुकान बंद कर दिया है. इन सब से परे सेवा भाव की एक अनोखी मिसाल भी देखी जा रही है. कोई अस्पताल में मरीज और इनके परिजनों को भोजन उपलब्ध करा रहा है तो कोई मजदूर और गरीबों को.

    भरपेट भोजन महज 5 रुपये में उपलब्ध

    देवघर शहरी क्षेत्रों में काफी संख्या ने शहर के बाहर या दूर दराज के मजदूर मजदूरी करने प्रतिदिन आते है. कई ऐसा क्षेत्र रहता है जहां सिर्फ होटल या रेस्टोरेंट का संचालन होता है. इनमें ऊंची दर पर भोजन मिलने से मजदूरी करने वाले की जेब कभी भी इजाज़त नहीं देती की ये इस जगह जाकर अपनी भूख मिटा सकें. मजदूरों की मजबूरी को दूर करने के लिए समाजसेवी नागेंद्र नाथ बलियासे सामने आए और अपने स्वर्गीय पिताजी के नाम पर बाबूजी का प्यार शुद्ध स्वस्थ आहार की शुरुआत की. लगभग एक साल से अधिक समय से प्रतिदिन बाबा बलिया से  मजदूरों को भरपेट भोजन महज 5 रुपिया में उपलब्ध करा रहे है.

    लकड़ी के चूल्हे पर जलती सेवा की लौ

    इसमे चावल,दाल,सब्जी,मिठाई, पापड़,सलाद ,आचार रहता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस की किल्लत हो जाने से गरीबो को भोजन करवाने में काफी परेशानी इन्हें हुई. कुछ दिन तो इन्हें भोजन कार्यक्रम को बंद करना पड़ गया. फिर इन्हें गरीबों के भोजन की चिंता होने लगी. तब इन्होंने गैस सिलेंडर को दरकिनार कर चूल्हा का निर्माण कराया और बाजार से लकड़ी खरीदकर फिर से गरीबों के लिए भोजन उपलब्ध करवाने का काम शुरू कर दिया. नागेंद्र नाथ उर्फ बाबा बलियासे ने बताया कि कितना भी कठिनाई क्यों न आए ग़रीब, मजबूर और असहाय लोगों के लिए भरपेट भोजन की सेवा को रुकने नही दिया जाएगा.

    श्रील फाउंडेशन नाम की एक भोजनालय

    सदर अस्पताल में अधिकांश वैसे मरीज आते है जो बड़े अस्पतालों में इलाज करवाने में सक्षम नहीं होते हैं. ऐसे में इन मरीजों का एक मात्र विकल्प के तौर पर सदर अस्पताल ही बचता है. सरकारी अस्पताल के बाहर कई निजी होटल है जहां दिन हो या रात हमेशा खाने की सामग्री उपलब्ध रहती है. लेकिन इन जगहों पर अधिक कीमत पर लोगों को खरीदना मजबूरी होती है. ऐसे में यहाँ इलाजरत मरीज और इनके परिजनों के लिए देवघर के सामाजिक कार्यकर्ता और समाज सेवियों ने मिलकर अस्पताल परिसर में कम दर पर भोजन उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया और कुछ वर्ष पहले श्रील फाउंडेशन नाम की एक भोजनालय शुरू हुई.

    महज 10 रुपिया में उपलब्ध कराई जाती है भोजन

    यहां दोपहर का भोजन चावल,दाल, सब्जी, पापड़,भुजिया,सलाद और रात्रि भोजन में रोटी ,सब्जी इत्यादि महज 10 रुपिया में उपलब्ध कराई जाती है. अस्पताल परिसर में भोजनालय होने का लाभ मरीज और इनके परिजन उठाते नज़र आते है. यहाँ बड़ी संख्या में लोगों का भोजन बनाने के लिए अच्छी खासी गैस की खपत भी प्रतिदिन होती है. लेकिन इनदिनों गैस सिलेंडर की कमी होने से श्रील फाउंडेशन को संचालित करने वाले समाज सेवी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लकड़ी पर खाना बनाने का निर्णय लिया ताकि किसी मरीज और इनके परिजनों को भोजन के लिए कठिनाई नहीं उठानी पड़े.

    एक तो उमस भरी गर्मी और ऊपर से लकड़ी की आग, दो तरफा गर्मी के बाबजूद मरीज, परिजन, मजदूर और गरीबों के लिए बहुत सस्ता, स्वस्थ आउट स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराना वाकई एक मिसाल से कम नही है. श्रील फाउंडेशन और बाबा बलियासे की सेवा भाव वाकई आने वाले लोगों के लिए प्रेरणा साबित होगा.

    रिपोर्ट - रितुराज सिन्हा 


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