भाजपा नेता का नया नारा, जिसका वोट, उसका विकास


धनबाद (Dhanbad) : गैंग्स ऑफ वासेपुर ,अपराध की छवि समेटे वासेपुर ,बॉलीवुड में धमक बनानेवाला वासेपुर ,देश की सेवा में आईएएस देने वाला वासेपुर. वासेपुर की मिट्टी की विशेषता है कि किसी न किसी मामले को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहती है. ताजा मामला धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा के बयान को लेकर है. सबका साथ सबका विकास के संकल्प पत्र पर काम करने वाली भाजपा के ही विधायक ने नया राग अलाप दिया, वोट नहीं तो विकास नहीं.
क्या है मामला
दरअसल विधायक मंगलवार को वासेपुर के रहमतगंज में सड़क के उद्घाटन के लिए वासेपुर पहुंचे थे. उद्घाटन के बाद ऐसा कुछ कह दिया कि सबके निशाने पर आ गए. विधायक ने साफ साफ कहा कि वासेपुर के लोग उनको वोट नहीं देते, इसलिए उनके फंड से विकास के हक़दार भी नहीं है. उनकी प्राथमिकता उन जगहों के लिए है और रहेगी, जहां से वोट मिलता है. हालांकि जब उन्हें अहसास हुआ कि कड़वी बात हो गई है तो थोड़ा सुधार करते हुए कहा कि वासेपुर के लोग उनसे अलग होकर चलते हैं. परेशानियों की जानकारी भी नहीं देते हैं. बावजूद वे इस इलाके का ध्यान रखते हैं. आगे कहा कि यह बात सच है कि वासेपुर उनकी प्राथमिक सूची में नहीं है. लेकिन दस काम अगर उनके फंड से होता है तो दो काम वासेपुर में भी करवाने की वे कोशिश करते हैं.
विपक्ष का हल्ला बोल
हल्ला बोलने के लिए तैयार बैठे विपक्ष के नेताओं की दनादन प्रतिक्रिया आने लगी. सवाल दागा जाने लगा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज सिन्हा का अलग लाइन है. प्रधानमंत्री कहते हैं कि सबका साथ ,सबका विकास ,सबका विश्वास लेकर ही उनकी सरकार चलती है. तो फिर विधायक यह कैसे कह सकते या कर सकते हैं कि जहां से उन्हें वोट नहीं मिलता ,वहां के लोगों को विकास मांगने का कोई हक़ नहीं है. विधायक के इस कथन को धनबाद ने बैड टेस्ट में लिया है. लोग पूछ रहे हैं कि विधायक जी यह बतलाए कि वासेपुर के वे विधायक हैं कि नहीं. अगर वे नहीं हैं तो कौन हैं. और अगर वे हैं तो वासेपुर के विकास के लिए वे ठीकरा किसी और के माथे पर कैसे फोड़ सकते हैं. विपक्षी पार्टियां सवाल दर सवाल कर राज बाबू को घेरने में जुट गई है.
कांग्रेस उवाच
कांग्रेस के वरीय नेता सह पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता थोड़े हैं राज सिन्हा. देश में कांग्रेस ही है जो सबको साथ लेकर चलती है. राज सिन्हा तो साम्प्रदायिक पार्टी के है. जहां भी रहेंगे या जाएंगे जहर ही घोलने का काम करेंगे.
जनता का होता जनप्रतिनिधि
निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि संवैधानिक पद पर चले जाने के बाद इस तरह का कथन निंदनीय ही नहीं घोर आपत्तिजनक है. विधायक तो विधायक ही होता है. चुनाव जितने के बाद वह पूरी जनता का प्रतिनिधि हो जाता है. जो वोट दिए उनका भी और जो नहीं दिए उनका भी.
राज सिन्हा का राजनीतिक सफर
2009 में वे पहली बार विधायक का चुनाव लड़े. कांग्रेस के मन्नान मल्लिक से वे लगभग 900 वोटों से हार गए. . 2014 में फिर वे भाजपा की टिकट पर मैदान में उतरे. इस बार धनबाद की जनता ने उन्हें हाथो हाथ लिया. 52 हज़ार से भी अधिक वोटों से वे चुनाव जीते. 2019 में जीत का अंतर कमा जरूर लेकिन लगभग 30 हज़ार वोटों से उनकी जीत हुई.
अभिषेक कुमार, ब्यूरो हेड, धनबाद
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