कोविडकाल में जीवन सैकडों को जीवन देने वाली नर्स क्यों अब मांग रही इच्छामृत्यु, जानिये

    कोविडकाल में जीवन सैकडों को जीवन देने वाली नर्स क्यों अब मांग रही इच्छामृत्यु, जानिये

    सिमडेगा(SIMDEGA): सिमडेगा में कोरोनाकाल में संक्रमितों को सेवा कर प्राणरक्षा करने वाली नर्सें भुखमरी के कगार पर पंहुच गई हैं. भूख से बिलबिलाते परिवार को देख अब ये सरकार और जिला प्रशासन से खुद इच्छामृत्यु की मांग करने लगी है.  

    कोरोनाकाल में लोगों की सेवा कर जान बचाने वाली नर्से हो गई बेरोजगार

    सिमडेगा में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब सदर अस्पताल में आईसीयू संचालित करने वाला कोई जानकार नहीं था] तब बाहर काम कर रही नर्सों को सिमडेगा स्वास्थ्य विभाग आईसीयू में कार्य करने के लिए सदर अस्पताल में बहाल किया गया. नर्सों ने पूरे तन्मयता से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मरीजों को सेवा प्रदान कर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब मरीजों को उनके ही घर वाले छूने से इंकार करने लगे थे उस वक्त इन्ही नर्सों ने अपनों से बढ़कर सेवा देते हुए मरीजों को स्वस्थ कर घर भेजा था. लेकिन कोरोनाकाल की समाप्ती के बाद इन सभी नर्सों को स्वास्थ्य विभाग ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. दूसरे जगहों से ये पहले नौकरी छोड़कर आई थी. अब यहां से भी हटा दिए जाने के बाद इनकी स्थिति न घर की रही न घाट की.  नर्सों ने बताया कि बहाली के दौरान सिविल सर्जन ने कहा था कि अस्पताल कभी बंद नहीं होता. कोरोनाकाल के बाद भी सभी नर्स सेवा देगी. लेकिन कोरोना की तीसरी लहर खत्म होते ही 31 मार्च को सभी नर्सों को सेवामुक्त कर दिया गया.

    नर्से मांग रही इच्छामृत्यु

    नौकरी नहीं रहने से इनके सामने परिवार चलाने की समस्या उत्पन्न हो गई है. ये सभी नर्स पूर्व में बड़े निजी अस्पतालों में कार्यरत थी. लेकिन घर में काम देने का नाम लेकर इन्हें संक्रमण काल में बुला लिया गया. सभी दूसरे जगहों से नौकरी छोड़कर आई और अब यहां से भी हटा दी गई. नौकरी चले जाने के बाद से सभी बेरोजगार हो गई. जिससे इनके सामने भुखमरी की स्थिति आ गई है. परिवार की तकलीफ देख अब ये प्रशासन और सरकार से फिर से नौकरी या इच्छामृत्यु देने की मांग कर रही हैं.  

    प्रदेश महासचिव ने कही ये बात

    इंटक प्रदेश महासचिव दिलीप तिर्की के साथ इन नर्सों ने सोमवार को घोडबहार के पास बैठक कर इच्छामृत्यु की मांग की है. नर्सों ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन इन्हें नौकरी दे या इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करें.  दिलीप तिर्की ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की उदासीन रवैये ने एक दर्जन परिवार को भुखमरी के कागार पर खड़ा कर दिया है. उन्होने नर्सों द्वारा इच्छामृत्यु की मांग को लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा कि अब जिला प्रशासन इन नर्सों के पेट पालने का उपाय करें नहीं तो इनमें से एक भी आत्महत्या करेगी तो उसकी जिम्मेदार जिला प्रशासन होगी.


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