धरती आबा शहदत दिवस : सरकार बदली, नहीं बदला सिर्फ उलिहातू- पानी तक नसीब नहीं

    धरती आबा शहदत दिवस : सरकार बदली, नहीं बदला सिर्फ उलिहातू- पानी तक नसीब नहीं

    खूंटी(KHUNTI) धरती आबा बिरसा मुंडा की शहादत को याद कर आज झारखंड की आंखें नम हैं. क्योंकि जिस अबुआ दिशोम अबुआ राज के लिए उन्होंने कुर्बानी दी, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है. समूचे राज्य की बदहाली की तस्वीर की बात छोड़िये बिरसा की जन्मस्थली भी पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है. महिलाएं चिलचिलाती धूप में चुआं से पानी लाकर पीने को विवश हैं. बिरसा की याद में 15 साल पहले बने स्मारक कॉम्प्लेक्स में भी पानी की सुविधा नहीं. 

    बिजली के सिर्फ खंभे ही लगे

    बिजली के नाम पर गांव में खंभे लगे हैं. जिसपर तार भी झूल रहे हैं. लेकिन बिजली नदारद. इसके दर्शन कभी-कभार ही होते हैं. बिरसा मुंडा की जयंती हो या शहादत दिवस. मंत्रियों समेत सरकारी अमले की कतार लग जाती है, वो बड़े-बड़े वादे भी कर जाते हैं, जो बाद में कोरा आश्वासन ही साबित होता है.

    अर्जुन मुंडा उलिहातू पहुंचेंगे

    आज भी शहादत दिवस पर केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा उलिहातू आने वाले हैं. आज भी वादों की बरसात होगी। ये पहले भी ऐसे अवसरों पर आ चुके हैं. इनके अलावा अविभाजित बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव, तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, रघुवर दास से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कई बार यहां आ चुके हैं.

    रिपोर्ट- मुजफ्फर हुसैन, खूंटी


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