विडंबना: सीधी नौकरी के स्पष्ट सरकारी आदेश के बावजूद DC दफ्तर के चक्कर लगा रहे सबर युवा

    विडंबना: सीधी नौकरी के स्पष्ट सरकारी आदेश के बावजूद DC दफ्तर के चक्कर लगा रहे सबर युवा

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): झारखंड सहित पूरे देश में आदिम जनजाति अब विलुप्त होने के कगार पर है. उनके विकास के लिए हर सरकार योजनाएं बनाती हैं, लेकिन धरातल  सच कुछ और ही है. जबकि उनकी नौकरी के लिए सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि आदिम जनजाति का युवा अगर मैट्रिक पास है उनकी नियुक्ति सीधे होगी. इसी आस में सिंहभूम के सबर युवा डीसी दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं, इनमें लड़के और लड़किया दोनों शामिल हैं.  एक दर्जन से ज्यादा आदिम जनजाति के युवा और युवतियां नौकरी के लिए भटक रहे हैं.  सभी ग्रेजुएट हैं.

     

    विलुप्त होने की कगार पर है आदिम जनजाति

    आपको बता दें कि पूर्वी सिंहभूम जिला में आदिम जनजातियों की संख्या काफी कम है. विलुप्त हो रहे इस जनजाति समुदाय को बचाने की जरूरत है और इसको लेकर सरकार ढेर सारी योजना लेकर आई. लेकिन इन आदिम जनजातियों तक सरकार की योजना नहीं पहुंच रही है. जबकि  इसके लिए ना तो साक्षात्कार देना होगा और ना ही किसी प्रकार के सरकारी व्यवस्था से गुजरना होगा. लेकिन प्रदर्शन कर रहे युवा युवती आदिम जनजाति नौकरी की तलाश उपायुक्त कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं.

    जानिये झारखंड में कितनी है इनकी आबादी

    माल पहाड़िया- 1.35 लाख
    बिरहोर- 10,727
    कोरबा- 35,000 
    बिरजिया- 6276
    सौरेया पहाड़िया- 46,000
    परहिया- 25000
    कोरबा- 35 000
    असुर- 22,459
    सबर- 9688
    बिझिंया- 14404 

    विलुप्तप्राय जनजातियां
    खोंड -221
    बंजारा -487
    बैगा -3582
    बाथुड़ी -3464
    गोड़ाईत -2975
    कंवर -8145 है.

    (सोर्स- ट्राइबल वेलफेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट की वेबसाइट.)

    रिपोर्ट: रंजीत ओझा, जमशेदपुर



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