करीब 40 अवैध क्रशर बंद करने पर प्रशासन के विरुद्ध क्यों खड़ी हो गईं जिला प्रधान- जानिये वजह


झुमरी तिलैया (JHUMRI TELAIYA) - झारखंड राज्य खनिज संपदाओं से भरा पड़ा है. इसके हर एक क्षेत्र में विरासत के स्वरूप कुछ ना कुछ उपहार लोगों के लिए है. जो उनके रोजी रोजगार के लिए मुख्य साधन बना है. कोडरमा जिले में भी खासकर डोमचांच प्रखंड के क्षेत्रों में क्रशर उद्योग दशकों से चलता आ रहा है. क्रशर उद्योग न केवल कोडरमा क्षेत्र की पहचान ही है बल्कि यह हजारों परिवार की रोजी रोटी का मुख्य साधन भी रहा है. लेकिन अवैध क्रशर को जिला प्रशासन ने ध्वस्त करवा दिया है, जिसको लेकर लोगों में नाराजगी है. जिनकी अगुवाई जिला प्रधान शालिनी गुप्ता कर रही हैं. इस खबर में जानिये कि उनके विरोध की मुख्य वजह क्या है.
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अवैध उद्योगों को लेकर प्रशासन कठोर, 40 क्रशर किया ध्वस्त
दरअसल जिला प्रशासन ने अवैध उत्खनन और पर्यावरण संरक्षण के नियमों के अधीन मरकच्चो प्रखंड अंतर्गत खटोलिया के लगभग 40 क्रशरों को एक साथ ध्वस्त कर दिया है. प्रशासन के इस सख्ती भरे रवैए से व्यवसाय से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है. इससे जुड़े मजदूरों के बीच रोजी-रोटी को लेकर चिंता भी है.

क्या बोलीं जिला प्रधान
क्षेत्र के इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करते हुए जिला प्रधान शालिनी गुप्ता ने जिला प्रशासन से अपील की है कि नियमों में लचीलापन लाकर कुछ समय में ही सारी कागजी कार्यवाही पूरी की जा सकती है. अगर नियम विरुद्ध क्रशर चल रहे हैं, तो इससे जुड़े मजदरों के लिए पहले रोजगार की व्यवस्था प्रशासन को कर लेनी थी, इसके बाद कार्रवाई की जाती वहीं उन्होंने वर्षों पुरानी मांग क्षेत्र का सीमांकन करते हुए इसे औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा देने की मांग दोहराई है. शालिनी गुप्ता ने कहा कि कृषि से संबंधित नियमों को कृषि उद्योग व्यवसाय खुद निराकरण करने के इच्छुक हैं, जिसमें जिला प्रशासन का सहयोग अत्यंत आवश्यक है.
रिपोर्ट : अमित कुमार, झुमरी तिलैया
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