झारखंड मॉर्निंग अपडेट्स : एक नजर में पढ़िए रांची के अखबारों की क्या हैं हेडलाइंस

    झारखंड मॉर्निंग अपडेट्स : एक नजर में पढ़िए रांची के अखबारों की क्या हैं हेडलाइंस

    अगर सुबह की हड़बड़ाहट में नहीं पढ़ पाए हैं न्यूज़पेपर तो एक नजर में पढ़िए खास खबरें. बुधवार दिनांक 20 अप्रैल को रांची के कुछ प्रमुख अखबारों की हेडलाइंस इस प्रकार है-

     रांची में अप्रैल में नहीं हुई बारिश, गर्मी का 5 साल का रिकॉड्र टूटा, पारा 42 डिग्री : पिछले पांच साल क गर्मी का रिकॉर्ड इस सीजन के अप्रैल में टूट गया है. मंगलवार को रांची सबसे ज्यादा गर्म रही. हीट वेव ने लोगों को परेशान किया. रांची का पारा 41.6 डिग्री रहा जो पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा है.  (दैनिक भास्कर)

    त्रिकूट रोप –वे दुर्घटना की जांच 4 सदस्यीय कमेटी करेगी : त्रिकुट रोप-वे दुर्घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई है. समिति को दो माह के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है. (दैनिक भास्कर)

    दारू बेचने पर आमदा हेमंत सरकार, आचार संहिता तोड़कर निकाला टेंडर : झारखंड सरकार की नई उत्पाद नीति के प्रति व्यवसायी रूचि नहीं दिखा रहे हैं. यही वजह है कि पूर्व में विभिन्न श्रेणियों में निकाले गए टेंडर में आवश्यकता के अनुरूप एजेंसियां सामने नहीं आ सकीं. झारखंड स्टेट वेबरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) को मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए दस जोन में टेंडर के माध्यम से प्लेसमेंट एजेंसियों को आमंत्रित किया गया था. इसके लिए एक अप्रैल को टेंडर निकला था, जिसके लिए 16 अप्रैल तक जमा करने की अंतिम तिथि थी, लेकिन केवल चार जोन के लिए चार प्लेसमेट एजेंसियां ही सामने आई. ( दैनिक जागरण)

    सियासत को लेकर नजरें राजभवन पर, 27 को शाह से मिलेंगे राज्यपाल : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर खदान का लीज लेने का आरोप लगने के बाद राज्यपाल ने मामले को चुनाव आयोग भेज दिया है. दूसरी तरफ कांके के भाजपा विधायक समरी लाल को जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग सत्ता पक्ष ने की है. (प्रभात खबर)

    1000 करोड़ के धान घोटाले की जांच सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी : झारखंड हाईकोर्ट ने जस्टिस केपी देव की कोर्ट ने मंगलवार को गढ़वा पलामू जिले में धान खरीदारी में हुए 1000 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच की मांग पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान जस्टिस दवे ने पूछा कि जब धान की खरीदारी वर्ष 2011, 2012 और वर्ष 2013 में हुई तो दो साल बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों दिया गया? (दैनिक भास्कर)


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