मंत्री जी के गांव में ही पानी को लेकर हाय-हाय…घड़े भर पानी के लिए तय करनी पड़ती लंबी दूरी

    मंत्री जी के गांव में ही पानी को लेकर हाय-हाय…घड़े भर पानी के लिए तय करनी पड़ती लंबी दूरी

    चतरा (CHATRA) : पानी इंसान के जीवन की मूलभूत जरूरत है. लेकिन झारखंड के चतरा जिले में एक ऐसा गांव है जहां पानी के लिए लोग तरस रहे हैं. सवाल सबसे बड़ा इसीलिए भी है कि इसी गांव से झारखंड की राजनीति शुरू करने वाले शख्स आज सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, नाम है उनका सत्यानंद भोक्ता. जब माननीय मंत्री के गांव में ही गर्मी की तपिश चढ़ने के साथ ही चापाकल खराब हो जाते हैं, और कुआं भी सूख जाता है तो समझिए झारखंड के अन्य गांव और जिलों की स्थिति क्या होती होगी. बात सदर प्रखंड के कारी गांव की हो रही है.

    गांव से दूर एक कुआं

      कारी गांव के लोग 1 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर एक ही एक ही कुआं से पानी भरते हैं और अपने घर तक ले जाते हैं. अब सवाल उठता है कि गर्मी चढ़ने के साथ ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग कहां सोया रह जाता है. गांव में पेयजल के साधन हैं, लेकिन खराब हैं. ले देकर के मात्र एक कुआं है और इसी कुआं से पूरे गांव की प्यास बुझती हैं. हालांकि मंत्री सत्यानंद भोक्ता का कहना है कि कारी गांव में पर्याप्त कुंआ एवम चापाकल है।लेकिन यदि फिलहाल कोई समस्या है तो तुरंत ठीक कर दिया जाएगा.

    अपना ही गांव प्यास से बेहाल

    कारी गांव में मंत्री सत्यानंद भोक्ता का अपना बचपन बीता है. इसी गांव की गलियों में कभी रहने वाले सत्यानंद भोक्ता आज हेमंत सोरेन सरकार में श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण मंत्री हैं. लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि अपने गांव के लोगों को सबसे जरूरी चीज पानी की सुविधा भी मुहैया मंत्री जी नहीं करा पाए हैं. ऐसे में विकास के दावे की बातें तो शायद बेमानी होगी.

    आते तो हैं, पर सुनते कहां

    गांव की मासूम महिलाएं यह तो जरूर कहती है कि गांव में मंत्री जी आते हैं लेकिन यह भी कहती है कि वे उनकी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं. महिलाओं का कहना है कि तपती दुपहरी में माथे पर तसला एवं अन्य सामान लेकर गांव के कुएं तक पहुंचती हैं और घंटों इंतजार के बाद एक घड़ा पानी उन्हें नसीब होता है. गांव के लोगों का कहना है कि गांव में पेयजल का संकट काफी गहरा गया है और आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर होने वाली है. गांव वालों का कहना है कि मंत्री जी आते जरूर हैं ,अपने गांव के लोगों से मिलते भी हैं पर किसी समस्या का निवारण नहीं कर पाते हैं.

     बहरहाल, मंत्री सत्यानंद भोक्ता अपने गांव के लोगों को ही प्यास नहीं बुझा पाते हैं तो अपने विधानसभा क्षेत्र या पूरे प्रदेश में विकास की रफ्तार क्या होगी, यह निर्णय किया जा सकता है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता का कहना है कि यदि पेयजल संकट है तो दूर हो जाएगा. हालांकि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का पूरा नेटवर्क काम करता है लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि आप मीडिया के माध्यम से ही हमें इस बात की जानकारी मिली है और यह भी बताया कि यदि समस्या है तो उसका निदान कर दिया जाएगा. लेकिन सवाल यह भी उठता है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का प्रत्येक गांव में टीमें जलसहिया से लेकर अन्य लोग गांव गांव तक हैं. फिर भी मंत्री के गांव में पानी का संकट हुआ तो पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को आखिर इसकी जानकारी क्यों नहीं पहुंच पाया है.

    रिपोर्ट : संतोष कुमार, चतरा


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