विश्व ऑटिज़्म दिवस : दिव्यांग जनों को चाहिए सबका प्यार और दुलार ,सामान बर्ताव की जरुरत

    विश्व ऑटिज़्म दिवस : दिव्यांग जनों को चाहिए सबका प्यार और दुलार ,सामान बर्ताव की जरुरत

    धनबाद(DHANBAD) - झारखण्ड शिक्षा परियोजना के समावेशी शिक्षा के तहत संचालित झरिया रिसोर्स सेंटर के तत्वावधान में विश्व ऑटिज़्म दिवस के अवसर पर नया प्राथमिक विद्यालय 4 नम्बर ,सब्जी बागान में जागरूकता कार्यक्रम  किया गया. बच्चों को दिव्यांग बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करने की नसीहत दी गई.  झरिया रिसोर्स सेंटर के फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ मनोज सिंह ने कहा कि आटिज्म या स्वलीनता एक न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी विकार है, ऐसे बच्चों की स्थिति में सामाजिक स्वीकार्यता से सुधार लाया जा सकता है. 

    ऑटिज़्म को नियंत्रित किया जा सकता है ,बशर्ते

    डॉ मनोज ने कहा कि थोड़ी सावधानी और थोड़े से प्यार-दुलार से ऑटिज़्म को नियंत्रित किया जा सकता है. रिसोर्स शिक्षक अखलाक अहमद ने कहा कि ऑटिज्म के शिकार लोगों में सामाजिकता का आभाव होता है, इसके अलावा इनमें पुनरावृत्ति व्यवहार की भी समस्या होती है.  अपने में खोया रहना और उत्तेजक व्यवहार इनका मुख्य लक्षण है.  अख़लाक़ ने कहा कि सामान्यतः 3 वर्ष से पूर्व लक्षण दिखने लगते है.  दिव्यांग जनों को चाहिए समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी.   विद्यालय के प्रधान शिक्षक  संजय प्रजापति ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के साथ सुगम व्यवहार करना चाहिए , उन्हें नाम से पुकारे और सहयोग करे.  कार्यक्रम में फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ मनोज सिंह, रिसोर्स शिक्षक अखलाक अहमद, शिक्षक संजय प्रजापति, विक्रम केशरी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे. 


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