पेशरार में लकड़ी माफिया के कारण जल, जंगल, जमीन का अस्तिव संकट में, नक्सल क्षेत्र का बहाना बना कर वन विभाग मौन

    पेशरार में लकड़ी माफिया के कारण जल, जंगल, जमीन का अस्तिव संकट में, नक्सल क्षेत्र का बहाना बना कर वन विभाग मौन

    लोहरदगा (LOHARDAGA) - सरकार जल, जंगल, जमीन बचाने का दावा सिर्फ कागजों पर करती हुई लग रही हैं, क्योंकि धरातल पर जंगलों की कटाई जोरों से हो रही है. जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जंगलों कटाई जोरों पर है. वनपट्टा लेने के लिए लोग जंगलों की कटाई कर जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. माफियाओं द्वारा भी जंगलों में जोरों से लकड़ी की कटाई की जा रही है. साथ ही जंगलों में ही बड़े बड़े लकड़ियों से बाउंड्री लाइन बना कर उसके अंदर लकड़ी से पटरी और वस्तुएं बनाए जा रहे है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण वन विभाग को नहीं पुलिस की सहायता नहीं मिलती है. वन विभाग में कम संख्या में वनकर्मी होने के कारण सही दिशा में कार्रवाई नहीं हो पा रहा है.

    जंगलों में नक्सलियों का कब्जा

    लोहरदगा जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र पेशरार प्रखंड के केरार और आसपास के जंगलों में सखूवा के पेड़ों की अवैध कटाई जोरों पर है. लकड़ी माफिया पहले सखुआ के पेड़ों की छाल को नीचे से निकाल देते हैं. ताकि कुछ दिनो बाद यह पेड़ सूख जाए. जिसके बाद इन पेड़ों की कटाई कर देते है. पूरे जंगल के इलाके में पेड़ों की कटाई जोरों पर है. अगर इसी तरह होते रहा तो जंगल जल्द समाप्त हो जायेगा. लोहरदगा डिवीजन के वन प्रमंडल पदाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया की पेशरार के केरार क्षेत्र में वन विभाग को परेशानी होती है. यह इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के साथ ही जंगलों में नक्सलियों द्वारा कई जगहों पर लैंड माइंस लगाया गया है. साथ ही सेंसटिव क्षेत्र होने के कारण पुलिस भी सहायता नहीं कर पाती है. इस क्षेत्र में फोन नेटवर्क की भी समस्या है. जब भी सूचना मिलती है मौके पर जाकर कार्रवाई की जाती हैं. इन क्षेत्र के लोगों में यह भ्रम फैला हुआ है कि वनपट्ठा को लेकर और जमीन का मिलने वाले फायदे को उठाने के लिए लोगों से वनों की कटाई करवाई जाती हैं. इस इलाके में वन माफिया पूरी तरह से हावी है.

    रिपोर्ट : गौतम लेनिन, लोहरदगा


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