झारखंड में यहां की जा रही काले गेहूं की खेती, जानिए किन रोगों के लिए रामबाण है काला गेहूं

    झारखंड में यहां की जा रही काले गेहूं की खेती, जानिए किन रोगों के लिए रामबाण है काला गेहूं

    देवघर (DEOGHAR) : आमतौर पर सामान्य गेहूं को रबी मौसम का मुख्य फसल माना जाता है और देश के कुछ राज्यों में इसकी बंपर पैदावार होती है. लेकिन देवघर के कृषि विज्ञान केंद्र में अब काले गेहूं की फसल प्रयोग के तौर पर लगाई गई है. किसानों को इसकी उपज के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

    काले गेहू में सामान्य गेहू से अधिक विटामिन और मिनरल्स

    भारत में सामान्य गेहूं की बंपर पैदावर होती है और आम से लेकर खास लोगों के भोजन का यह आधार होता है. लेकिन देवघर के कृषि विज्ञान केंद्र में अब काले गेहूं की फसल उगाई जा रही है और किसानों को इसकी अधिक से अधिक फसल उगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस काले गेहूं में सामान्य गेहूं से अधिक विटामिन और मिनरल्स पाया जाता है जो कैंसर, शुगर और  अल्जाइमर सहित अन्य बीमारियों के मरीज के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. एंथोसायिनीन नामक एक पदार्थ के इस गेहूं में पाए जाने का दावा वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है जो एन्टी ऑक्सीडेंट होता है. इसके अलावे भी विटामिन,मिनरल्स सहित आयरन और जिंक भी पर्याप्त मात्रा में इसमें पाए जाने का दावा किया जा रहा है.

    आधा एकड़ जमीन में काले गेहूं की फसल लगाई गई

    देवघर के सुजानि स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रयोग के तौर पर आधा एकड़ जमीन में काले गेहूं की फसल लगाई गई है. कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में यहां की मिट्टी में इसकी फसल का परीक्षण किया जा रहा है. सब कुछ ठीक रहने पर स्थानीय किसानों को इसकी अधिक से अधिक पैदावार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. वहीं कुछ किसानों के लिए यह कौतूहल का विषय बन गया है. अगर सब कुछ ठीक रहा तो यहां के किसान भी इस गेहूं की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की बात कह रहे हैं. झारखंड में पहली बार काले गेहूं की फसल देवघर में लगाई गई है. अगर यहां की मिट्टी और जलवायु इसके लिए उपयुक्त साबित हुई तो यह गेहूं की फसल के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.

    रिपोर्ट : रितुराज सिन्हा, देवघर

     


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