सांसद सुनील महतो की पुण्यतिथि आज : शहर ने दी श्रद्धांजलि, अब तक परिवार को नहीं मिला न्याय


जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) - जमशेदपुर के लोग 4 मार्च 2007 की शाम नहीं भूल सकते जब उन्हें अपने प्रिय सांसद सुनील महतो की हत्या की खबर मिली. जमशेदपुर से सटे पूर्वी सिंहभूम जिला के घाटशिला के बाघुड़िया में नक्सली राहुल के दस्ते ने गोलियों से भूनकर सांसद सुनील महतो की हत्या कर दी थी. ये आज़ाद भारत की पहली घटना थी जब सांसद रहते अपने ही संसदीय क्षेत्र में किसी सांसद की हत्या हो गई. हर साल की तरह पत्नी सुमन महतो ने कदमा गणेश पूजा मैदान में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी. सुमन महतो को इस बात का दुख है कि पहले सीबीआई शिथिल रही और अब एनआईए जांच की अनुशंसा के बावजूद कोई पहल नहीं हो रही. भले ही सुमन महतो अपनी पार्टी झामुमो पर खुलकर कुछ नहीं कहती, लेकिन पहले जहां सुनील महतो की जयंती या पुण्यतिथि पर गुरूजी शिबू सोरेन, सीएम हेमंत सोरेन से लेकर तमाम झामुमो के दिग्गजों का जमशेदपुर में जमावड़ा लगता था और न्याय दिलाने की बात होती थी, अब कुछ सालों से ये सिलसिला थम सा गया है.
हत्यारों का पता नहीं लगा पाई सीबीआई
दिवंगत सांसद सुनील महतो हत्याकांड की जांच सीबीआई ने लगभग एक दशक से भी ज्यादा समय तक की. लेकिन किसने हत्या की सुपारी दी, इसका पता नहीं लगा सकी. मुख्य आरोपी राहुल ने बंगाल में कुछ साल पहले सरेंडर किया लेकिन सीबीआई उसे ठीक से रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं कर सकी. पत्नी सह पूर्व सांसद सुमन महतो कहती हैं कि अब उन्होंने आस छोड़ दी है. जब रघुवर दास सीएम बने तो अप्रैल 2018 में उन्होंने एन आईए जांच की अनुशंसा की. तब उम्मीद बंधी थी कि अब साजिशकर्ता सामने आएंगे और पर्दाफाश होगा. लेकिन एन आईए की तरफ से कोई पहल न होती देख सुमन महतो को लगता है कि महज खानापूर्ति की गई है, किसी की मंशा ही नहीं कि पर्दाफाश हो.
रिपोर्ट: अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर
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