झामुमो सरकार की नीतियों से कांग्रेस को जनाधार खिसकने का हुआ भय, मंत्री बन्ना गुप्ता ने लगाया जनता दरबार तो भाषा विवाद को लेकर डॉ अजय ने की प्रेसवार्ता

    झामुमो सरकार की नीतियों से कांग्रेस को जनाधार खिसकने का हुआ भय, मंत्री बन्ना गुप्ता ने लगाया जनता दरबार तो भाषा विवाद को लेकर डॉ अजय ने की प्रेसवार्ता

    जमशेदपुर(JAMSHEDPIR)-भोजपुरी-मगही-हिन्दी को क्षेत्रीय भाषा से हटाने के मुद्दे पर छिड़े राज्यव्यापी विवाद से कांग्रेस को अपना जनाधार खिसकने का भय हो गया है. दो दिन पहले गिरिडीह में चिंतन शिविर में जहां मंत्री बन्ना गुप्ता ने भाषा के मुद्दे पर अपनी ही सरकार पर बरसते हुए इस्तीफे की चेतावनी दी वहीं शनिवार को जमशेदपुर में तिलक पुस्तकालय में उन्होंने जनता दरबार लगाया.जनता दरबार में ज़मीन, अपराध, नौकरी, पेंशन समेत विभिन्न मुद्दों पर जनता की समस्याएं सुनीं.बाद में मीडिया से बातचीत में मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि  कांग्रेस के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडेय के निर्देश पर जनता दरबार लगाया जा रहा है ताकि जनता से संवाद बना रहे. जमशेदपुर में बढ़ते अपराध पर मंत्री ने कहा कि वे शहर को ऐसा बनाना चाहते हैं जहां मां बहन रात 12बजे भी बिना भय के घूम सकें. उन्होंने कहा कि सरकार लोक से चलती है और अगर ट्रेन डिरेल होगी तो वे इस्तीफा देने को भी तैयार हैं.

    क्षेत्रीय भाषाओं में हिन्दी को शामिल करने की मांग की-Dr अजय कुमार

    उधर भोजपुरी मगही हिन्दी को क्षेत्रीय भाषा से हटाने से उपजे विवाद के बीच पूर्व सांसद सह कांग्रेस नेता Dr अजय कुमार  ने एक प्रेसवार्ता कर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को उन्होंने पत्र लिखा है और उम्मीद है कि सरकार सही फैसले करेगी. डॉक्टर अजय ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के लिए जिलावार क्षेत्रीय भाषाओं में हिन्दी को शामिल करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि झारखंड में ज्यादार लोग हिन्दी माध्यम से ही पढ़ रहे हैं इसलिए ऐसा करना उचित होगा. मीडिया की ओर से जब पूछा गया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस और हेमंत सरकार के बीच कहीं  रिश्ते तो तल्ख नहीं  हो रहे हैं, इस डा. अजय ने बचाव करते हुए कहा कि सरकार की नीयत अच्छी है. लेकिन निर्णय गलत है. लेकिन मंत्री बन्ना गुप्ता और डा. अजय कुमार की बातों से सवाल तो उठने ही लगे हैं. हालांकि डा. अजय कुमार ने क्षेत्रीय भाषाओं मगही भोजपुरी उड़िया  को लेकर पूर्व सीएम रघुवर दास के दुख को घड़ियाली आंसू बताते हुए कहा कि रघुवर सरकार के समय क्षेत्रीय भाषाओं  को लेकर कुछ नहीं किया गया.

    रिपोर्ट:अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर


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